Pashupatinath-Supaul-Baidyanathdham Corridor: बिहार से झारखंड और नेपाल तक की कनेक्टिविटी मजबूत होने वाली है. भारत और नेपाल के बीच धार्मिक संपर्क को मजबूत करने वाली एक सड़क परियोजना में अब बिहार के महत्वपूर्ण तीर्थस्थल कुशेश्वरस्थान को भी शामिल किया गया है. पशुपतिनाथ मंदिर से लेकर देवघर के बैद्यनाथ धाम तक प्रस्तावित हाई स्पीड कॉरिडोर में कुशेश्वरस्थान को जोड़ने का फैसला उत्तर बिहार के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.
केंद्र के इस फैसले से न सिर्फ श्रद्धालुओं की यात्रा आसान होगी, बल्कि बिहार के कई जिलों में कारोबार, पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. यह सड़क नेपाल, मिथिला और झारखंड को धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से जोड़ने वाली एक खास कड़ी बन सकता है.
लोगों के समय की बचत
प्रस्तावित कॉरिडोर के पूरा होने के बाद काठमांडू से देवघर की यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है. जानकारी के मुताबिक, मौजूदा समय में इस सफर में करीब 13 से 14 घंटे लग सकते हैं, जबकि नई सड़क कनेक्टिविटी के बाद इसे लगभग 3 से 4 घंटे तक लाने का लक्ष्य बताया जा रहा है.
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की ओर से कॉरिडोर को गैंडोल-कुशेश्वरस्थान-खगड़िया रूट से ले जाने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है. दरभंगा के सांसद डॉ. गोपालजी ठाकुर ने बताया कि उन्होंने अप्रैल में केंद्रीय मंत्री के सामने इस रूट को शामिल करने की मांग रखी थी.
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तीन शिवधामों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत
इस परियोजना को लेकर सबसे खास बात यह बताई जा रही है कि इससे तीन महत्वपूर्ण शिवधामों- पशुपतिनाथ, कुशेश्वरनाथ और बैद्यनाथ धाम के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी. बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से मिथिलांचल के धार्मिक पर्यटन को फायदा मिल सकता है. देश के अलग-अलग हिस्सों और नेपाल से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इन तीर्थस्थलों की यात्रा पहले के मुकाबले काफी आसान हो सकती है.
इन जिलों को मिलेगा खास फायदा
जानकारी के मुताबिक, प्रस्तावित कॉरिडोर का रूट सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, दरभंगा, खगड़िया, मुंगेर और बांका जैसे जिलों से होकर देवघर तक जाने की बात कही गई है. ऐसे में इन जिलों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत हो सकेगी. साथ ही स्थानीय बाजार, कृषि उत्पाद, छोटे कारोबार और माल परिवहन को भी बेहतर सड़क संपर्क का फायदा मिल सकता है. सड़क किनारे नए व्यापारिक केंद्र, होटल, ढाबे और पर्यटन से जुड़े रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है.
कम खर्च में कुशेश्वरस्थान को जोड़ने की योजना
बताया जा रहा है कि कुशेश्वरस्थान को कॉरिडोर से जोड़ने के लिए मौजूदा सड़क ढांचे के इस्तेमाल का सुझाव भी दिया गया है. करीब 301 करोड़ रुपये की लागत से बन रही 25 किलोमीटर लंबी पश्चिमी कोसी तटबंध सड़क को लिंक के तौर पर इस्तेमाल करने की बात सामने आई है. लेकिन प्रस्ताव पर अमल होने नए सिरे से जमीन अधिग्रहण और सड़क निर्माण का खर्च मेनटेन करने की चर्चा है.
