Padma Awards 2026: गणतंत्र दिवस 2026 के मौके पर बिहार को दोहरी खुशी मिली है. एक ओर पद्मश्री सम्मान की सूची में राज्य की चार विभूतियों के नाम चमके हैं, तो दूसरी ओर बिहार पुलिस के जांबाज अफसरों को गैलेंट्री और विशिष्ट सेवा पदक से नवाजा गया है.
यह खबर सिर्फ सम्मान की नहीं, बल्कि उस जज्बे की है जिसने बिहार को राष्ट्रीय फलक पर मजबूती से खड़ा किया है.
डोमचक के महारथी विश्व बंधु को मरणोपरांत सम्मान
लोक नृत्य को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले पटना के दानापुर निवासी विश्व बंधु को मरणोपरांत पद्मश्री दिया गया है. डोमकच लोक नृत्य को मंचीय प्रतिष्ठा दिलाने में उनका योगदान बहुमूल्य रहा.
छह हजार से अधिक प्रस्तुतियों के जरिए उन्होंने बिहार की लोक-संस्कृति को देशभर में स्थापित किया. 95 वर्ष की आयु में 30 मार्च 2025 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी विरासत अमर हो गई.
भोजपुरी गीतों के लिए 7 दशकों से समर्पित रहे भरत सिंह भारती
भोजपुर के नोनउर गांव के भरत सिंह भारती को भोजपुरी लोकगीतों के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया है. महज 10 वर्ष की उम्र में कीर्तन मंडलियों से शुरू हुआ उनका सफर सात दशकों तक भोजपुरी लोक-संस्कृति को जीवित रखने का प्रतीक बन गया.
तबला, हारमोनियम, ढोलक और बांसुरी जैसे वाद्य यंत्रों में उनकी महारत ने लोकगायन को नई ऊंचाई दी. 1962 से आकाशवाणी पटना से जुड़कर उन्होंने भोजपुरी को घर-घर तक पहुंचाया.
गोपालजी ने प्रयोगशाला को खेती-किसानी से जोड़ा
मुजफ्फरपुर के बंदरा प्रखंड के मतलुपुर गांव निवासी और राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ गोपालजी त्रिवेदी को पद्मश्री मिलना विज्ञान और खेती के सेतु को सम्मान देने जैसा है.
उन्होंने कृषि अनुसंधान को प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखकर किसानों की रोजमर्रा की जरूरतों से जोड़ा. उनकी सोच ने बिहार में वैज्ञानिक खेती को नई दिशा दी और हजारों किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद की.
कालाजार मरीजों के लिए दूत बनकर आये डां श्याम सुंदर
मुजफ्फरपुर के सूतापट्टी निवासी डॉ श्याम सुंदर माखड़िया को पद्मश्री मिलना स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में समर्पण की मिसाल है.
1994 में रामबाग में कालाजार रिसर्च सेंटर की स्थापना कर उन्होंने बीमारी के खिलाफ लड़ाई को संगठित रूप दिया. उनके शोध के आधार पर प्रभावी दवाएं विकसित हुईं और अब तक 20 हजार से अधिक मरीजों का मुफ्त इलाज हो चुका है.
छपरा जेल विद्रोह से लेकर गैलेंट्री मेडल तक, बहादुरी की मिसाल
गणतंत्र दिवस 2026 पर बिहार पुलिस के 22 पदाधिकारियों और कर्मियों को सम्मानित किया गया है. 2002 में मंडल कारा, छपरा में हुए भीषण कैदी विद्रोह को नियंत्रित करने में अदम्य साहस दिखाने के लिए कुंदन कृष्णन, अर्जुन लाल और जितेंद्र सिंह को पुलिस मेडल फॉर गैलेंट्री दिया गया है.
कैदी विद्रोह के समय एसपी रहे कुंदन कृष्णन आज बिहार STF के डीजी हैं. उनका पुलिस करियर साहसिक फैसलों और सख्त प्रशासनिक रवैये के लिए जाना जाता है. वहीं अर्जुन लाल, जो उस समय पुलिस अवर निरीक्षक थे, अब डीएसपी पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं. सिपाही रहे जितेंद्र सिंह आज पटना में दारोगा के पद पर कार्यरत हैं. तीनों की यह यात्रा बताती है कि बहादुरी सिर्फ एक पल की नहीं, बल्कि पूरे करियर की पहचान बन जाती है.
छपरा जेल विद्रोह आज भी बिहार पुलिस के इतिहास का सबसे चुनौतीपूर्ण अध्याय माना जाता है. उस घटना में दिखाई गई सूझबूझ और साहस को अब राष्ट्रीय पहचान मिली है. यह सम्मान न सिर्फ तीन अधिकारियों के लिए, बल्कि पूरे बिहार पुलिस बल के मनोबल को ऊंचा करने वाला है.
मुख्यमंत्री ने जतायी खुशी
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पद्मश्री और पुलिस पदकों पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि यह बिहार के लिए गौरव का क्षण है. कला, साहित्य, विज्ञान, चिकित्सा और सुरक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले ये लोग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं.
