पटना से अनुराग प्रधान की रिपोर्ट
NEET UG 2026 Re-Exam: नीट-यूजी परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थियों को बैठाने का मामला अब राज्यव्यापी गिरोह और मेडिकल कॉलेज नेटवर्क का रूप लेता नजर आ रहा है. लखीसराय में नौ फर्जी परीक्षार्थियों की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों का फोकस उन मेडिकल छात्रों और उनके सहयोगियों पर है, जिनके तार बिहार समेत देश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों से जुड़े बताए जा रहे हैं.
बीएचयू, एम्स रायबरेली समेत कई संस्थानों के छात्र गिरफ्तार
जिला प्रशासन के अनुसार गिरफ्तार किए गए सभी फर्जी परीक्षार्थी मेडिकल के छात्र हैं. इनमें बीएचयू, एम्स रायबरेली और अन्य मेडिकल कॉलेजों के छात्र शामिल बताए जा रहे हैं. गिरफ्तार आरोपियों में अर्पित राज, पूनम कुमारी, सौरभ झा, मयंक कश्यप, अमन अग्रवाल सहित अन्य नाम शामिल हैं.
इस मामले में सबसे चर्चित नाम अर्पित राज का है. बताया जा रहा है कि वर्ष 2024 में भी उसे परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थी बैठाने के आरोप में हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार अधिकांश आरोपी मेडिकल छात्र हैं और इनमें बीएचयू, एम्स रायबरेली, अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज, गया समेत अन्य संस्थानों के छात्र शामिल हैं. पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को आशंका है कि यह कोई स्थानीय गिरोह नहीं, बल्कि कई राज्यों में एक्टिव एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है.
20 और 21 जून को मेडिकल कॉलेजों से ली गई छुट्टियां जांच के घेरे में
जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि कई मेडिकल कॉलेजों के छात्र 20 और 21 जून को बीमारी या अन्य कारणों का हवाला देकर छुट्टी पर थे. जबकि सभी मेडिकल कॉलेजों के स्टूडेंट्स को पहले ही 20 और 21 जून को कॉलेज में रहने के लिए कहा गया था. स्टूडेंट्स की सभी छुट्टियां रद्द कर दीं गईं थीं. इसके बावजूद कई एमबीबीएस छात्र बीमारी का हवाला देकर गायब रहे. अब पुलिस उन छुट्टियों के रिकॉर्ड, रजिस्टर और मोबाइल लोकेशन का मिलान कर रही है. आशंका जताई जा रही है कि इन्हीं दिनों गैंग के सदस्य अलग-अलग परीक्षा केंद्रों तक गए होंगे
मोबाइल कॉल डिटेल्स से खुल रहे नेटवर्क के तार
जांच एजेंसियां गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और सोशल मीडिया संपर्कों को खंगाल रही है. इसी के आधार पर गया, पटना, नालंदा समेत कई जिलों में लगातार छापेमारी की जा रही है. पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही इस नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सकेगा.
40 से अधिक हिरासत में, बढ़ सकती है संख्या
लखीसराय से शुरू हुई कार्रवाई अब राज्य स्तर पर फैल चुकी है. अब तक नौ फर्जी परीक्षार्थियों की गिरफ्तारी की पुष्टि हुई है, जबकि 40 से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. इनमें बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन प्रक्रिया से कुछ कर्मियों के भी जांच के दायरे में होने की चर्चा है. अधिकारियों का मानना है कि गिरफ्तार आरोपियों की संख्या और बढ़ सकती है. इसके साथ ही अलग-अलग जिलों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस बनाने वाले निजी एजेंसी से भी पुलिस पूछताछ कर रही है.
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
परीक्षा को लेकर इस बार बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और निगरानी के दावे किए गए थे. इसके बावजूद फर्जी परीक्षार्थियों का परीक्षा केंद्रों तक पहुंचना और परीक्षा में शामिल होना, सुरक्षा व्यवस्था की विफलता माना जा रहा है. सवाल यह भी उठ रहा है कि बिना किसी आंतरिक सहयोग के इतनी सख्त जांच प्रक्रिया को पार करना कैसे संभव हो गया.
डीएम-एसपी की संयुक्त निगरानी में जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए लखीसराय के डीएम शैलेंद्र कुमार और एसपी प्रेरणा कुमार की निगरानी में जांच जारी है. पुलिस का दावा है कि पूरे नेटवर्क के अंतिम छोर तक पहुंचने के लिए तकनीकी और मानवीय दोनों स्तरों पर जांच की जा रही है.
अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जांच का दायरा और बढ़ेगा और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा. परीक्षा में सामने आया यह फर्जीवाड़ा अब केवल लखीसराय तक सीमित नहीं रह गया. मोबाइल नेटवर्क, मेडिकल कॉलेजों से छात्रों की भूमिका और अलग-अलग जिलों में चल रही छापेमारी ने इसे बिहार के हालिया वर्षों के सबसे ज्यादा परीक्षा घोटालों में शामिल कर दिया है.
PMCH के मयंक कश्यप ने ली थी छुट्टी
पकड़े गए 9 लोगों में एक मयंक कश्यप भी है. वह पीएमसीएच में एमबीबीएस का थर्ड ईयर का छात्र है. उसने स्वास्थ्य कारणों से छुट्टी ली थी. रविवार को वह कॉलेज के सेमिनार में नहीं पहुंचा. पुलिस अब यह जांच कर रही है कि बीमारी का बहाना बनाकर उसने कहीं गैंग की गतिविधियों में भाग तो नहीं लिया था.
30 से 40 लाख रुपये में सौदा
एसडीपीओ के अनुसार, अब तक की जांच में यह भी सामने आया है कि हर एक अभ्यर्थी के लिए 30 से 40 लाख रुपये में सौदा तय किया गया था, जिसमें पांच लाख रुपये पहले ही मिल गए थे. जबकि बाकी के पैसे मेडिकल कॉलेज मिलने के बाद देने की बात तय की गई थी.
