Nawada News : जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में जिले के शिक्षकों के लिए आयोजित पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शनिवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ. प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को नवीन शिक्षण पद्धतियों से अवगत कराना और विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना रहा. कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग समेत विभिन्न आधुनिक शिक्षण तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया.
दो मॉड्यूल के तहत 162 शिक्षकों ने लिया प्रशिक्षण
पांच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान दो अलग-अलग मॉड्यूल पर शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया. कक्षा 6 से 8 के शिक्षकों के लिए प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग के तहत 'चेष्टा-05' मॉड्यूल का प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें 47 शिक्षकों ने भाग लिया. वहीं, कक्षा 3 से 5 के शिक्षकों के लिए बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से 'दिशा-2.0' मॉड्यूल पर प्रशिक्षण दिया गया. इसमें 115 शिक्षकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया.
विद्यालयों में प्रशिक्षण के अनुभव को लागू करने पर जोर
समापन समारोह में डायट के प्राचार्य एखलाक खान ने कहा कि शिक्षकों का वास्तविक कार्यक्षेत्र उनका विद्यालय है. उन्होंने कहा कि पांच दिवसीय प्रशिक्षण तभी सार्थक माना जाएगा, जब शिक्षक यहां सीखी गई प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग और नवीन शिक्षण तकनीकों को विद्यालय के बच्चों तक पहुंचाएंगे. छात्रों के सर्वांगीण विकास और शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण बदलाव लाना ही प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य है.
रचनात्मक और आलोचनात्मक सोच विकसित करने पर जोर
संस्थान के आईक्यूएसी समन्वयक सह व्याख्याता राकेश कुमार ने प्रशिक्षण के तकनीकी एवं व्यावहारिक पक्षों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि पीबीएल मॉड्यूल 'चेष्टा-05' और 'दिशा-2.0' का उद्देश्य बच्चों में रटने की प्रवृत्ति को कम कर उनमें रचनात्मक एवं आलोचनात्मक सोच विकसित करना है. उन्होंने शिक्षकों से कक्षा में बच्चों को 'करके सीखने' के अधिक अवसर उपलब्ध कराने की अपील की, ताकि पठन-पाठन की प्रक्रिया को अधिक रोचक और प्रभावी बनाया जा सके.
प्रशिक्षण से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागी शिक्षकों को सफल प्रशिक्षण के लिए शुभकामनाएं दी गईं. संस्थान की ओर से उम्मीद जताई गई कि प्रशिक्षण में सीखी गई आधुनिक शिक्षण विधियों के विद्यालयों में प्रभावी उपयोग से नवादा जिले में पठन-पाठन का स्तर और बेहतर होगा तथा विद्यार्थियों के सीखने की क्षमता में सकारात्मक बदलाव आएगा.
