नवादा में 'सफेद बाघ' के वीडियो का सच: फेसबुक पर वायरल दावे का वन विभाग की जांच में हुआ बड़ा खुलासा!

Nawada White Tiger Video: सिरदला प्रखंड के पाण्डेडीह गांव में सोशल मीडिया पर सफेद बाघ दिखने का वीडियो वायरल होने से हड़कंप मच गया था. वन विभाग की टीम ने ऑन-ग्राउंड जांच के बाद पूरी सच्चाई सामने ला दी है. पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट.

Nawada White Tiger Video(पप्पु कुमार प्रभाकर): नवादा जिले के सिरदला प्रखंड से इस वक्त सोशल मीडिया की सनसनी और अफवाह से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है. फेसबुक (Facebook) पर पिछले कुछ दिनों से तेजी से वायरल हो रहे एक ‘सफेद बाघ’ (White Tiger) के वीडियो ने बाँधी पंचायत के पाण्डेडीह गांव सहित पूरे इलाके में खौफ और दहशत का माहौल पैदा कर दिया था. वीडियो को शेयर कर यह दावा किया जा रहा था कि यह खूंखार सफेद बाघ पाण्डेडीह गांव के बिल्कुल करीब जंगलों में घूम रहा है. हालांकि, अब इस पूरे मामले में वन विभाग की हाई-लेवल जांच रिपोर्ट सामने आ गई है, जिसने वीडियो के पीछे के काले सच का पर्दाफाश कर दिया है.

दिनदहाड़े निकलने में डर रहे थे ग्रामीण, वन विभाग ने संभाली कमान

सफेद बाघ का वीडियो जैसे ही वॉट्सऐप और फेसबुक ग्रुप्स में फैला, ग्रामीण पूरी तरह सहम गए. लोग लाठी-डंडे लेकर निकलने लगे और महिलाओं व बच्चों का अकेले घर से बाहर निकलना पूरी तरह बंद हो गया था. मामले की संवेदनशीलता और जनता के बीच बढ़ते डर को देखते हुए वन विभाग की टीम तुरंत अलर्ट मोड में आई. वन विभाग के अधिकारियों ने न केवल वायरल वीडियो की तकनीकी पड़ताल की, बल्कि पाण्डेडीह और उसके आस-पास के सुदूर जंगली और मैदानी क्षेत्रों का सघन ऑन-ग्राउंड निरीक्षण भी किया.

जांच में दावों की निकली हवा, एक भी सुराग या पदचिह्न नहीं मिला

गहन छानबीन और पूरे इलाके की खाक छानने के बाद वन विभाग ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट कर दिया है कि सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा 100% भ्रामक, मनगढ़ंत और पूरी तरह फर्जी है. वन प्रभारी ने बताया कि विभाग को पाण्डेडीह गांव या उसके आस-पास के किसी भी क्षेत्र में सफेद बाघ या किसी अन्य हिंसक वन्यजीव की मौजूदगी का कोई भी प्रमाण, सुराग या पदचिह्न नहीं मिला है.

वन प्रभारी ने ग्रामीणों से सीधे अपील करते हुए कहा कि यह वीडियो वास्तविक नहीं है, बल्कि कुछ शरारती तत्वों द्वारा केवल व्यूज बटोरने और समाज में भ्रम व दहशत फैलाने के उद्देश्य से एडिट करके प्रसारित किया गया है. उन्होंने कहा कि किसी भी सोशल मीडिया पोस्ट, फोटो या वीडियो पर बिना सोचे-समझे विश्वास न करें. ऐसी भ्रामक जानकारियां समाज में अनावश्यक डर पैदा करती हैं. वन विभाग अब आईटी सेल की मदद से इस फर्जी वीडियो को सबसे पहले अपलोड और फॉरवर्ड करने वाले उपद्रवियों को चिन्हित कर रहा है, ताकि उन पर केस दर्ज किया जा सके.

खौफ का साया हटा, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

वन विभाग की क्लीन चिट और जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद पाण्डेडीह गांव के लोगों ने आखिरकार राहत की सांस ली है. ग्रामीणों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से गांव में ऐसा डर बैठ गया था कि शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता था. बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा चिंतित थे. अब सच्चाई सामने आने के बाद स्थिति पूरी तरह सामान्य हो गई है और लोग बिना किसी डर के अपने खेतों और कामकाज पर लौट रहे हैं.

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Published by: Aditya Kumar Ravi

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