नवादा के अकबरपुर में किसानों के सामने संकट, धान की नर्सरी का समय शुरू, पर केंद्रों पर नहीं मिल रहा बीज

Nawada Seed Crisis News: नवादा जिले के अकबरपुर प्रखंड में मॉनसून आने के बाद भी किसानों को धान का बीज नहीं मिल पा रहा है. कृषि भवन के चक्कर काट रहे वीरेंद्र पासवान और अन्य किसानों ने बताया कि नर्सरी का समय बीता जा रहा है. प्रखंड कृषि पदाधिकारी गोविंद प्रसाद ने जताई बेबसी. पढ़ें रिपोर्ट.

Nawada Seed Crisis News (अनिल कुमार): नवादा जिले के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में से एक अकबरपुर प्रखंड से इस वक्त किसानों की चिंता को सातवें आसमान पर पहुंचाने वाली खबर सामने आ रही है. आसमान में मॉनसून के बादलों की दस्तक के साथ ही पूरे क्षेत्र में धान की मुख्य पारंपरिक खेती की तैयारियां बेहद तेज हो गई हैं. खेतों को तैयार कर चुके किसानों ने धान की नर्सरी (बिचड़ा) डालने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, लेकिन सबसे बड़ी प्रशासनिक लापरवाही यह है कि पूरे अकबरपुर प्रखंड में सरकारी स्तर पर धान का बीज अब तक उपलब्ध नहीं कराया जा सका है. इस घोर किल्लत के कारण क्षेत्र के हजारों किसान गहरी चिंता और घबराहट के माहौल में जी रहे हैं.

दिन भर कृषि भवन का चक्कर काट रहे हैं किसान, नक्षत्र बीतने से बढ़ रही है खेती की लागत

अकबरपुर प्रखंड के विभिन्न गांवों से आए जागरूक किसानों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए सरकारी दावों की पोल खोल दी है. बुजुर्ग किसानों के अनुसार, नक्षत्र और कृषि पंचांग के हिसाब से धान की नर्सरी लगाने का सबसे उपयुक्त और स्वर्णिम समय लाइव शुरू हो चुका है. खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाने वाला ‘नगबीसरा नक्षत्र’ भी अब धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रहा है. इसके बावजूद प्रखंड के प्रगतिशील किसान वीरेंद्र पासवान, राजेंद्र प्रसाद सिंह, महेंद्र राम, शंभू चौधरी एवं अशोक कुमार ने बताया कि वे पिछले कई दिनों से चिलचिलाती धूप में अकबरपुर कृषि भवन के चक्कर काट-काट कर थक चुके हैं, लेकिन अधिकारियों द्वारा उन्हें हर बार खाली हाथ वापस लौटा दिया जा रहा है.

सांकेतिक तस्वीर

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सरकारी गोदामों के साथ-साथ खुले बाजार में भी ब्लैकआउट, निजी दुकानदार उठा रहे हैं मजबूरी का फायदा

किसानों का साफ कहना है कि धान की नर्सरी डालने की जो सही समय सीमा है, वह हाथ से रेत की तरह लगातार निकलती जा रही है. सबसे बड़ी आफत यह है कि सरकारी वितरण केंद्रों पर तो ताले लटके ही हैं, साथ ही स्थानीय खुले बाजारों और प्राइवेट दुकानों में भी धान का कोई अच्छी कंपनी का प्रमाणित बीज पर्याप्त मात्रा में लाइव उपलब्ध नहीं है. बाजार में जो थोड़ा-बहुत बीज बचा भी है, उसे निजी दुकानदार मनमाने और ऊंचे दामों पर बेचकर किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं. किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले दो से तीन दिनों के भीतर उन्हें उन्नत बीज नहीं मिला, तो बिचड़ा तैयार होने में भारी देरी होगी, जिसका सीधा नकारात्मक असर आगामी धान की पूरी पैदावार और उत्पादन पर पड़ेगा.

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प्रखंड कृषि पदाधिकारी गोविंद प्रसाद ने जताई बेबसी, बोले “ऊपर से बीज आते ही तुरंत करेंगे लाइव वितरण”

इस पूरे गंभीर कृषि संकट और किसानों के बढ़ते आक्रोश के बीच अकबरपुर के प्रखंड कृषि पदाधिकारी (BAO) गोविंद प्रसाद ने भी ऑन-रिकॉर्ड अपनी लाचारी और बेबसी स्वीकार कर ली है. उन्होंने मीडिया को आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि जिला मुख्यालय और राज्य कृषि विभाग द्वारा अभी तक अकबरपुर ब्लॉक के लिए धान के बीजों का मुख्य आवंटन उपलब्ध नहीं कराया गया है. जैसे ही जिला स्तर से बीजों की खेप प्रखंड मुख्यालय पहुंचेगी, बिना एक मिनट की देरी किए विभागीय दिशा-निर्देशों और सब्सिडी के नियमों के अनुसार कैंप लगाकर किसानों के बीच उसका लाइव वितरण पारदर्शी तरीके से शुरू कर दिया जाएगा.

बहरहाल, सरकारी फाइलों और वादों की इस सुस्त रफ्तार के बीच अकबरपुर के किसान हर सुबह उम्मीद भरी निगाहों से कृषि दफ्तर की ओर ताक रहे हैं. अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन समय रहते गहरी नींद से जागता है या नवादा के इस मुख्य कृषि क्षेत्र के किसानों को इस साल सूखे की कगार पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.

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Published by: Aditya Kumar Ravi

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