Nawada News : बिहार सरकार की ओर से चलाये गये परिवार नियोजन पखवाड़े के दौरान नवादा जिला स्वास्थ्य समिति ने बेहतर प्रदर्शन किया है. विभागीय जानकारी के अनुसार, 11 से 31 जुलाई तक जिले में परिवार नियोजन पखवाड़े का आयोजन किया गया. इस दौरान लोगों को परिवार नियोजन के विभिन्न साधनों और उनसे होने वाले लाभों की जानकारी दी गयी. महिला बंध्याकरण, पुरुष नसबंदी, अंतरा, माला-एन, छाया समेत परिवार नियोजन के अन्य साधनों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूकता अभियान चलाया गया.
महिला बंध्याकरण में नवादा राज्य में दूसरे स्थान पर
परिवार नियोजन पखवाड़े के दौरान जिलेभर में रैली, नुक्कड़ नाटक और अन्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक किया गया. विभागीय आंकड़ों के अनुसार, पूरे बिहार में महिला बंध्याकरण के मामले में नवादा जिला स्वास्थ्य समिति दूसरे स्थान पर रही, जबकि पुरुष नसबंदी में जिले को छठा स्थान प्राप्त हुआ. पखवाड़े को सफल बनाने में पिरामल फाउंडेशन की भी अहम भूमिका रही.
महिला बंध्याकरण में 1002, पुरुष नसबंदी में 23 उपलब्धियां
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, परिवार नियोजन पखवाड़े के दौरान जिले में महिला बंध्याकरण के 1002 मामले दर्ज किये गये, जबकि पुरुष नसबंदी के 23 मामले सामने आये. इसके अलावा आईयूसीडी के 1928, अंतरा के 3607, कंडोम के 1,47,824, माला-एन के 34,425, ईसीपी के 13,892 और छाया के 35,613 लाभार्थी रहे.
काशीचक ने महिला बंध्याकरण में किया बेहतर प्रदर्शन
महिला बंध्याकरण के लक्ष्य को पूरा करने में काशीचक प्रखंड ने जिले में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया. काशीचक ने 175 प्रतिशत, वारिसलीगंज ने 155 प्रतिशत और कौआकोल ने 139 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया. वहीं पुरुष नसबंदी में अकबरपुर ने 120 प्रतिशत और कौआकोल ने 100 प्रतिशत लक्ष्य पूरा किया. काशीचक और पकरीबरावां ने पुरुष नसबंदी में 80 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया.
परिवार नियोजन की जिम्मेदारी अब भी महिलाओं पर अधिक
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, परिवार नियोजन की जिम्मेदारी आज भी मुख्य रूप से महिलाओं पर है. करीब 56.9 प्रतिशत महिलाएं बंध्याकरण कराती हैं, जबकि पुरुषों की भागीदारी लगभग एक प्रतिशत से भी कम है. स्वास्थ्य विभाग की ओर से पुरुषों की भागीदारी बढ़ाने और परिवार नियोजन को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है.
सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर की गयी थी तैयारी
परिवार नियोजन पखवाड़े को सफल बनाने के लिए जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर कैनोपी के साथ आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करायी गयी थीं. स्वास्थ्यकर्मियों की ओर से लोगों को परिवार नियोजन के विभिन्न साधनों की जानकारी देने के साथ उनके लाभों के बारे में भी बताया गया.
स्वास्थ्य विभाग और पिरामल फाउंडेशन की रही अहम भूमिका
पखवाड़े को सफल बनाने में सिविल सर्जन डॉ. विनोद कुमार चौधरी, उपाधीक्षक डॉ. एसडी अरैयर, सलाहकार शैलेश सिंह, पिरामल फाउंडेशन के जिला कोऑर्डिनेटर नवीन कुमार पांडेय, डॉ. प्रेमशीला, डॉ. अमिता आजाद, ओटी इंचार्ज प्रशांत कुमार सिन्हा समेत जिलेभर की सभी स्वास्थ्य संस्थाओं के अधिकारियों और कर्मियों ने अहम भूमिका निभायी.
Also Read : PHOTOS: औरंगाबाद में बच्चों ने इस प्रकार मनाया 'विश्व आदिवासी दिवस'
