Nawada News : नवादा. (रिपोर्ट: मनोज मिश्रा). नवादा शहर के बीचों-बीच स्थित प्रसिद्ध संकटमोचन (हनुमान) मंदिर सिर्फ हिंदुओं की आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र में सौहार्द और ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ की एक जीती-जागती मिसाल है. पटना-रांची मुख्य मार्ग पर स्थित यह ऐतिहासिक मंदिर उन चंद धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां दो अलग-अलग धर्मों के लोग एक ही जगह पर पूरी श्रद्धा के साथ अपनी मुरादें लेकर पहुंचते हैं.
मंदिर और मजार की साझा दीवार
इस मंदिर की सबसे बड़ी और अनूठी विशेषता इसकी भौगोलिक स्थिति और इसका सामाजिक ताना-बाना है. संकटमोचन मंदिर की दीवार से ठीक सटकर हजरत सैयद शाह जलालुद्दीन बुखारी की पवित्र मजार स्थित है. यहां धर्म की कोई दीवार नहीं है. जुमेरात (गुरुवार) और जुम्मा (शुक्रवार) के दिन यहां का नजारा बेहद खास होता है. इन दोनों दिन हिंदू और मुस्लिम, दोनों ही समुदाय के लोग यहां पहुंचते हैं और अपनी मुराद पूरी होने पर मजार पर चादर व शिरनी (प्रसाद) चढ़ाकर भाईचारे का संदेश देते हैं.
हनुमत जयंती पर उमड़ता है आस्था का सैलाब
मुख्य सड़क पर होने के कारण यहां प्रतिदिन दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है. मंदिर प्रबंधन और स्थानीय लोगों के सहयोग से यहां साल भर धार्मिक आयोजन होते रहते हैं. विशेषकर श्री हनुमत जयंती और अन्य प्रमुख त्योहारों के मौके पर मंदिर परिसर में भव्य परिक्रमा, नवाह पाठ और कीर्तन-भजन का आयोजन किया जाता है. इन विशेष अवसरों पर शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों से हजारों की संख्या में भक्त भगवान बजरंगबली का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं.
