पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन जैनियों ने की ''''मार्दव धर्म'''' की आराधना

NAWADA NEWS.दस दिवसीय आत्मशुद्धि के महापर्व पर्युषण के दूसरे दिन शुक्रवार को जैन धर्मावलंबियों ने दशलक्षण धर्म के द्वितीय स्वरूप ''उत्तम मार्दव धर्म'' की विशेष आराधना की.

प्रतिनिधि, नवादा कार्यालय

दस दिवसीय आत्मशुद्धि के महापर्व पर्युषण के दूसरे दिन शुक्रवार को जैन धर्मावलंबियों ने दशलक्षण धर्म के द्वितीय स्वरूप ””उत्तम मार्दव धर्म”” की विशेष आराधना की. जिला मुख्यालय में अस्पताल रोड स्थिति महावीर जैन मंदिर और भगवान महावीर के प्रथम शिष्य गौतम गणधर स्वामी की निर्वाण भूमि गुणावां जी दिगंबर जैन मंदिर में पंच परमेष्ठी स्वरूप जिनेंद्र प्रभु का श्रद्धापूर्वक विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना की गयी. आत्मशुद्धि के इस अनुष्ठान के दौरान जैनियों ने अष्टद्रव्य से दशलक्षण धर्म के द्वितीय स्वरूप ””उत्तम मार्दव धर्म”” की विशेष आराधना की और अपने व्यवहारिक जीवन में विनयशीलता को आत्मसात करने का संकल्प लिया. दीपक जैन ने ””उत्तम मार्दव धर्म”” के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मार्दव का अर्थ विनम्रता है. अहंकार को तिलांजलि दे सहजता से हर परिस्थिति को स्वीकार करने की वृत्ति को ही ””उत्तम मार्दव धर्म”” कहते हैं. उन्होंने कहा कि उत्तम मार्दव धर्म दशलक्षण धर्म का दूसरा चरण है, जो आत्मा की कठोरता को पिघलाकर उसे कोमल बनाता है. यह धर्म आत्मा को मैं श्रेष्ठ” अथवा ””मैं ही सही”” जैसी संकीर्णताओं से मुक्त करा कर विनयशीलता के पथ पर अग्रसर करता है. पंच परमेष्ठी भगवान की मंगल आरती के साथ दूसरे दिन के अनुष्ठान का समापन हुआ. दोनो मंदिरों में पूजा अर्चना व शाम की आरती के लिए जैन धर्मावलंबी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं. यह दस दिनों का उत्सव जैन समाज के लिए काफी पवित्र माना जाता है.

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By VISHAL KUMAR

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