जिले में 50 हजार संदिग्ध राशन कार्ड की जांच शुरू

राशन कार्ड से जुड़ी अन्य योजनाओं पर भी पड़ेगा असर

राशन कार्ड से जुड़ी अन्य योजनाओं पर भी पड़ेगा असर

सदा से विवादों के घेरे में रही है सार्वजनिक वितरण प्रणाली

संदिग्ध राशन कार्डधारियों की पात्रता की हो रही जांच

प्रतिनिधि, नवादा कार्यालय.

जिले में संदिग्ध राशन कार्डधारियों की पात्रता की जांच की जा रही है. खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग भारत सरकार की ओर से संदिग्ध लाभुकों की पहचान की गयी है. जिले में कुल 50,476 राशन कार्डधारियों को संदिग्ध लाभुकों की सूची में शामिल किया गया है. प्रशासन आम जनता से अपील कर रहा है कि राशन कार्ड सत्यापन में सहयोग करें, ताकि संदिग्ध राशन कार्ड का पता लगाया जा सके. केवल पात्र लाभुकों को ही योजना का लाभ मिलना है. ध्यान रहे कि राशन कार्ड से केवल अनाज की योजना का लाभ ही नहीं मिलता है, बल्कि राशन कार्ड रहने पर सरकार की अन्य दर्जनों योजनाओं का लाभ आसानी से मिल जाता है. राशन कार्ड होना सामान्य तौर पर गरीबी रेखा के नीचे के रहने वाले लोगोंं के तौर पर समझा जाता है. लेकिन, सच्चाई है कि इस योजना का लाभ कई गैर जरूरतमंद लाभुक भी ले रहे हैं.

शुरुआत से ही योजना में रही है गड़गड़ी

सार्वजनिक वितरण प्रणाली के शुरुआती दौर में ही लोगों की ओर से कई तिथियों का जिक्र किया जाता रहा है. 14 जनवरी 1945 को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी अनाज वितरण में गड़बड़ी की गयी थी. 1940 के बंगाल के अकाल के समय अनाज वितरण प्रक्रिया को सिस्टम में बनाकर जन वितरण प्रणाली की शुरुआत की गयी, जबकि आजादी के बाद इस संबंध में हरित क्रांति से पहले 1960 के दशक में की गयी. जून 1997 को भारत सरकार ने गरीबों पर ध्यान केंद्रित करते हुए लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीडीपी) की शुरुआत केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त जिम्मेदारी के अंतर्गत की थी. इसका मुख्य उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को कुपोषण और गरीबी से बचाने के लिए आवश्यक खाद्यान्न उपलब्ध कराना था. वर्ष 1997 में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधिकारिक तौर पर सार्वभौमिक से लक्षित योजना में बदल दिया गया. इसमें परिवारों को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया. उक्त दोनों श्रेणियों में गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) और गरीबी रेखा से ऊपर (एपीएल) किया गया था. इसमें बीपीएल परिवार वाले लोगों के लिए प्रति माह 10 किलो ग्राम अनाज दिया जाता था. पुनः उसे संशोधित कर 35 किलोग्राम किया गया, जो केंद्र सरकार की खरीद लागत का 50 प्रतिधत था.

संदिग्ध की पहचान के लिए जांच

26 मई 2025 को जिला प्रशासन ने प्रेस नोट जारी किया. बताया कि जिले में राशन कार्डधारी की पात्रता की जांच की जायेगी. जिले में 50476 राशन कार्ड को संदिग्ध माना गया है. मिली जानकारी के अनुसार, जिले में 1165 सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानें हैं. इसके अंतर्गत 401263 कार्डधारी लाभुकों को अनाज दिया जा रहा है. नवादा जिला सार्वजनिक वितरण प्रणाली पूर्व से ही संदेह के घेरे में रहा है. इससे पूर्व जिला पदाधिकारी यशपाल मीणा की ओर से सार्वजनिक वितरण की कई दुकानों का औचक निरीक्षण करने पर 70 हजार से अधिक संदिग्ध लाभुकों की संख्या पयी गयी थी. हाल ही में नवादा विधायक विभा देवी की ओर से लाभुकों को सही ढंग से सही मात्रा में सही समान नहीं दिये जाने का आरोप लगाकर बड़ा आंदोलन खड़ा किया गया था. अब भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक विभाग ने ही जिले के अंतर्गत 50476 लाभुकों को संदिग्ध पाया है.

अधिकारियों को दी गयी जिम्मेदारी

जिला आपूर्ति पदाधिकारी सुनील कुमार सिन्हा ने खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की ओर से नवादा सदर तथा रजौली अनुमंडल को चिह्नित किये तथा सभी की पात्रता की जांच के लिए एसडीओ नवादा एवं एसडीओ रजौली को संबंधित प्रखंडों के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी से कराने का निर्देश दिया है.

राशन कार्ड के आधार पर मिलेंगे कई लाभ

भारत सरकार ने 2025 में राशन कार्डधारकों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी दी है. इससे सिर्फ सस्ता या मुफ्त राशन नहीं, बल्कि राशन कार्ड पर आठ नये फायदे देने का ऐलान किया गया है. इस नयी योजना का लक्ष्य गरीब, जरूरतमंद और मध्यम वर्ग के परिवारों को ज्यादा आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा देना है. राशन कार्ड अब सिर्फ पहचान पत्र या सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि यह आपके परिवार की स्थिति को मजबूत करने का एक साधन बन गया है. इस बार राशन कार्ड के माध्यम से मिलने वाले लाभों की संख्या और दायरे दोनों बढ़ा दिये गये हैं. अब राशन कार्ड धारकों को हर माह 1000 रुपये प्रति माह की वित्तीय सहायता, फ्री हेल्थ इंश्योरेंस, एलपीजी गैस, सब्सिडी, मुफ्त बस यात्रा, डिजिटल राशन कार्ड, आवास योजना में प्राथमिकता, महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं और बच्चों की शिक्षा में मदद जैसे कई लाभ मिलेंगे. आयुष्मान कार्ड आदि का लाभ मिल रहा है.

क्या कहते हैं अधिकारी

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, भारत सरकार की ओर से नवादा सदर अनुमंडल के अंतर्गत 25,030 तथा रजौली अनुमंडल में 25,446 संदिग्ध लाभुक चिह्नित किये गये हैं. इन सभी की पात्रता की जांच के लिए एसडीओ नवादा सदर एवं रजौली को जिम्मेदारी दी गयी है. जांच प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद प्रत्येक लाभुक के संदर्भ में नियमानुकूल निर्णय लिया जायेगा.

सुनील कुमार सिन्हा, जिला आपूर्ति पदाधिकारीB

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Author: VISHAL KUMAR

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