नवादा : हिसुआ थाना क्षेत्र के पाचूगढ़ गांव में 23 वर्षीय पियूष कुमार उर्फ प्रणय की गोली मारकर हत्या को पुलिस ने गंभीरता से लिया है. अपराधियों तक पहुंचने के लिए पुलिस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. इस मामले में एसआइटी बनायी गयी है. पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय मगध क्षेत्र गया की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आठ सदस्यीय इस विशेष टीम की कमान नवादा के एसपी पुलिस अधीक्षक अभिनव धीमान को सौंपी गयर है.
एक सितंबर की वारदात ने मचा दी थी सनसनी
पुलिस महानिरीक्षक विकास वैभव के अनुसार, 1 सितंबर को हिसुआ थाना क्षेत्र के पाचूगढ़ गांव में अपराधियों ने पियूष कुमार उर्फ प्रणय, उम्र करीब 23 वर्ष, पिता मनीष कुमार भारती को गोली मार दी थी. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की. इस संबंध में हिसुआ थाना कांड संख्या 508/26 दर्ज किया गया है. प्राथमिकी बीएनएस की विभिन्न धाराओं के साथ 27 आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज की गयी है. अब पुलिस की जांच का दायरा घटना के पीछे की वजह, गोली चलाने वाले अपराधियों, उनके सहयोगियों और वारदात से पहले तथा बाद की गतिविधियों तक फैल गया है.
घटनास्थल पर पहुंचे आइजी ने दिये थे सख्त निर्देश
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए आईजी विकास वैभव का स्वयं घटनास्थल पर पहुंचना पुलिस की गंभीरता को दर्शाता है. उन्होंने घटनास्थल का बारीकी से जायजा लेने के साथ स्थानीय पुलिस अधिकारियों से घटना की पूरी जानकारी ली. आईजी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मामले से जुड़े हर संभावित पहलू को वैज्ञानिक तरीके से खंगाला जाए और उपलब्ध साक्ष्यों को अनुसंधान की कड़ी बनाया जाए. पुलिस का पहला लक्ष्य अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी है, जबकि इसके साथ ही वारदात के पीछे की पूरी कहानी सामने लाने की कवायद भी तेज कर दी गयी है.
आठ सदस्यीय एसआइटी, हर कड़ी को जोड़ेगी
मामले के अनुसंधान के लिए गठित विशेष अनुसंधान दल में कुल आठ पुलिस पदाधिकारियों को शामिल किया गया है. टीम का नेतृत्व पुलिस अधीक्षक अभिनव धीमान करेंगे. एसआइटी में सदर-2 एसडीपीओ सुरेश प्रसाद, हिसुआ अंचल पुलिस निरीक्षक दिगम्बर कुमार, नगर अंचल पुलिस निरीक्षक पंकज कुमार झा, हिसुआ थानाध्यक्ष मृत्युंजय कुमार, अपर थानाध्यक्ष अनील कुमार सिंह, डीआईयू प्रभारी विकास चंद्र यादव तथा तकनीकी शाखा के पुलिस अवर निरीक्षक आलोक कुमार को शामिल किया गया है. यानी अब मामले की जांच में स्थानीय पुलिस के साथ-साथ जिला पुलिस की विशेष अनुसंधान और तकनीकी टीम भी सक्रिय भूमिका निभाएगी.\
सीसीटीवी व मोबाइल लोकेशन को खंगालेगी पुलिस
अपराधियों तक पहुंचने के लिए एसआइटी ने वैज्ञानिक अनुसंधान को हथियार बनाया है. घटनास्थल और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को खंगाला जाएगा. घटना के समय इलाके में मौजूद संदिग्धों की गतिविधियों का पता लगाने के लिए मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का भी विश्लेषण किया जाएगा. पुलिस का प्रयास है कि घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और तकनीकी जांच से सामने आने वाले इनपुट को आपस में जोड़कर अपराधियों की गतिविधियों की पूरी कड़ी तैयार की जाए. तकनीकी जांच में संदिग्धों के संबंध में ठोस सुराग मिलने के बाद उनके संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जाएगी.
24 घंटे में होगी जांच की समीक्षा
एसआईटी को अनुसंधान में तेजी बनाए रखने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है. जांच की प्रगति की प्रत्येक 24 घंटे में समीक्षा की जाएगी और इसकी अद्यतन जानकारी वरीय अधिकारियों को उपलब्ध करायी जाएगी. इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जांच में सामने आने वाला कोई भी महत्वपूर्ण सुराग समय के साथ कमजोर न पड़े और अपराधियों तक पहुंचने की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ती रहे.
परिजनों की सुरक्षा में दो अंगरक्षक, पुलिस बल तैनात
गोलीकांड के बाद मृतक के परिजनों की सुरक्षा को लेकर भी पुलिस ने विशेष व्यवस्था की है. परिवार की सुरक्षा के लिए दो अंगरक्षक तथा 1/4 पुलिस बल को हाउस गार्ड के रूप में तैनात किया गया है. पुलिस के अनुसार, परिवार की सुरक्षा की लगातार निगरानी की जा रही है.
बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज
एसआईटी को स्थानीय पुलिस एवं अन्य संबंधित इकाइयों के साथ समन्वय स्थापित कर अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिया गया है. तकनीकी जांच से मिलने वाले इनपुट के आधार पर संभावित ठिकानों को चिह्नित कर वहां सर्च और छापेमारी अभियान चलाया जाएगा. पुलिस अब यह पता लगाने में भी जुटी है कि वारदात को अंजाम देने वालों के साथ कोई अन्य व्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा था या नहीं. घटना से पहले और बाद में संदिग्धों की गतिविधियां भी जांच के दायरे में हैं.
आइजी ने कहा- हर एंगल से होगी जांच
आईजी विकास वैभव ने स्पष्ट किया है कि मगध क्षेत्र की पुलिस इस घटना को अत्यंत गंभीरता से ले रही है. पुलिस की कोशिश उपलब्ध वैज्ञानिक, तकनीकी और अन्य साक्ष्यों को जोड़कर अपराधियों की पहचान करने और उन्हें जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की है. पाचूगढ़ के इस गोलीकांड के बाद एसआईटी के गठन और आइजी के हस्तक्षेप से जांच को नयर गति मिली है.
