स्वास्थ्यकर्मियों की लंबित मांगों को लेकर संघ ने खोला मोर्चा, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को सौंपा मांग-पत्र

Nawada News : नवादा में बिहार चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने 25 सूत्री मांगों को लेकर धरना दिया. बायोमेट्रिक हाजिरी और नियमितीकरण पर सरकार से की बड़ी मांग.

Nawada News : स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत कर्मियों की लंबित समस्याओं को लेकर बिहार चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने मोर्चा खोल दिया है. संघ की राज्य कार्यकारिणी के निर्णय के आलोक में शनिवार को प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, नवादा के समक्ष प्रदर्शन एवं धरना दिया गया. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के नाम मांग-पत्र सौंपा गया. संघ ने कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं के त्वरित निराकरण के साथ स्वास्थ्य व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की मांग की है.

बायोमेट्रिक हाजिरी की व्यवस्था पर जताई आपत्ति

संघ की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि स्वास्थ्य विभाग आपातकालीन सेवाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण विभाग है. ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत एएनएम, आशा, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, वैक्सीन कूरियर समेत अन्य स्वास्थ्यकर्मी टीकाकरण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं. संघ का कहना है कि इनके अथक प्रयासों के बावजूद कर्मचारियों को कई स्तरों पर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. संघ ने महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (एएनएम) के लिए पंचायत सरकार भवन में बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था पर आपत्ति जताई है. ज्ञापन में कहा गया है कि कई स्वास्थ्य उपकेंद्र पंचायत सरकार भवन से तीन से आठ-दस किलोमीटर तक दूर हैं. ऐसे में केवल उपस्थिति दर्ज कराने के लिए लंबी दूरी तय करने से वास्तविक स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं. संघ ने पूर्व की भांति कार्यस्थल पर उपस्थिति के आधार पर वेतन भुगतान की व्यवस्था बहाल करने की मांग की है.

एएनएम को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अधिक समय देने की मांग

संघ ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में एएनएम के जिम्मे टीकाकरण सहित कई महत्वपूर्ण कार्य हैं. ऐसे में उनकी कार्यक्षमता का इस्तेमाल कागजी अथवा पोर्टल संबंधी कार्यों में करने के बजाय उन्हें वास्तविक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अधिक समय दिया जाना चाहिए. विभागीय पोर्टल पर डाटा अपलोड कराने का कार्य स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात डाटा एंट्री ऑपरेटरों से कराने की मांग की गयी है.

नियमितीकरण और प्रोन्नति का मुद्दा भी उठाया

प्रमुख 25 सूत्री मांग-पत्र में स्वास्थ्य विभाग के संविदाकर्मियों की सेवा नियमित करने के लिए प्रतियोगिता परीक्षा के बजाय सक्षमता परीक्षा लेने की मांग की गयी है. इसके साथ ही अनुभव के आधार पर मिलने वाले अंकों से जुड़ी पात्रता की शर्त समाप्त करने, राज्य स्तरीय संवर्ग के कर्मचारियों को प्रोन्नति का लाभ देने तथा स्वास्थ्य समिति के कर्मचारियों के लिए संवर्ग नियमावली गठित कर सेवा समायोजित करने की मांग की गयी है. संघ ने लंबे समय से लंबित कार्य बहिष्कार अवधि के उपार्जित अवकाश को स्वीकृत कर मानदेय भुगतान करने की मांग भी उठायी है. साथ ही एएनएम एवं अन्य महिला स्वास्थ्यकर्मियों को मातृत्व अवकाश, चिकित्सा अवकाश समेत नियमानुसार अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गयी है.

गृह जिले या नजदीकी जिले में हो महिला स्वास्थ्यकर्मियों की पदस्थापना

ज्ञापन में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को उनके गृह जिले अथवा सीमावर्ती या निकटतम जिले में पदस्थापित करने की मांग को प्रमुखता से रखा गया है. संघ का कहना है कि सैकड़ों किलोमीटर दूर पदस्थापन के कारण महिला कर्मियों को पारिवारिक एवं व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा सामूहिक स्थानांतरण पर रोक, जीएनएम एवं एएनएम की सेवा संपुष्टि, शहरी क्षेत्रों में कार्यरत संविदागत अर्बन एएनएम को न्यूनतम 26 हजार रुपये वैधानिक मजदूरी तथा अन्य लाभ देने की मांग की गयी है. आउटसोर्सिंग कर्मियों को भी न्यूनतम मजदूरी एवं ईएसआई-ईपीएफ का लाभ देने की मांग संघ ने रखी है.

आशा, वैक्सीन कूरियर और स्वास्थ्य समिति कर्मियों की भी चिंता

संघ ने आशा एवं आशा फैसिलिटेटर तथा वैक्सीन कूरियर की बकाया प्रोत्साहन राशि का अविलंब भुगतान करने की मांग की है. स्वास्थ्य समिति कर्मियों के वेतन-मानदेय का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और प्रत्येक जिले को आवश्यक आवंटन उपलब्ध कराने की मांग भी की गयी है. मांग-पत्र में स्वास्थ्य के अधिकार को संविधान के मौलिक अधिकार में शामिल कर सरकारी अस्पतालों के माध्यम से आमजन को मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी की गयी है. साथ ही वर्षों से स्वीकृत रिक्त पदों पर नियमित पदस्थापन, विभिन्न संवर्गों की वरीयता सूची प्रकाशित करने तथा कर्मचारियों की अन्य लंबित समस्याओं के समाधान की मांग रखी गयी है.

मांगों पर वार्ता की तिथि निर्धारित करने का अनुरोध

संघ ने सरकार से इन मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता के लिए तिथि निर्धारित करने का अनुरोध किया है. संगठन का कहना है कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान होने से न केवल उनका मनोबल बढ़ेगा, बल्कि इसका सीधा सकारात्मक प्रभाव आम लोगों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी पड़ेगा.

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By Ashutosh kumar

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