भीषण गर्मी में बढ़ी मिट्टी के घड़ों की मांग

फ्रिज और आरओ के दौर में लोग फिर लौट रहे पारंपरिक ‘देशी फ्रिज’ की ओर

फ्रिज और आरओ के दौर में लोग फिर लौट रहे पारंपरिक ‘देशी फ्रिज’ की ओर प्रतिनिधि, मेसकौर प्रखंड में डेढ़ महीने से भीषण गर्मी का दौर जारी है. गर्मी के मौसम में लोगों के लिए सबसे जरूरी ठंडा पानी होता है. कुछ समय पहले तक फ्रिज के ठंडे पानी और आरओ का चलन जोरों पर था, लेकिन अब एक बार फिर लोग मिट्टी के घड़ों की ओर लौट रहे हैं. घड़े का पानी न केवल प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है, बल्कि उसका स्वाद भी अलग और सुकून देने वाला होता है. यही कारण है कि शहरों से लेकर गांवों तक बाजारों में मिट्टी के घड़ों की मांग बढ़ गयी है. मिट्टी के मटके बदलते समय के साथ अलग-अलग डिजाइन और रूप में बाजार में उपलब्ध हो रहे हैं, जो लोगों की पसंद बनते जा रहे हैं. इनकी बिक्री भी जोरों पर है. अब घर की रसोई, कमरों और यहां तक कि डाइनिंग हॉल में रखने के लिए भी आकर्षक डिजाइन वाले मिट्टी के घड़े बाजार में मिल रहे हैं. एक ओर संपन्न लोग फ्रिज का इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं सामान्य वर्ग के लोगों के लिए मिट्टी के बने घड़े और सुराही की मांग अधिक है. सामान्य वर्ग के लोगों के लिए यह किसी ‘देशी फ्रिज’ से कम नहीं है. प्रखंड के नदसेना, रसलपुरा, लक्ष्मीपुर, बहादुरपुर सहित कई गांवों में कुम्हार समुदाय के लोग मिट्टी के बर्तन बनाने का कार्य करते हैं. प्रखंड मुख्यालय में बुधवार और शनिवार को लगने वाले साप्ताहिक हाट में इस भीषण गर्मी के मौसम में मिट्टी के घड़े और सुराही की मांग काफी बढ़ गयी है. इस कारोबार में आमदनी कम कुम्हारों का कहना है कि यह उनका पैतृक व्यवसाय है और साल भर वे हाट-बाजारों में मिट्टी के बर्तन बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं. पहले की तुलना में इस पेशे में आमदनी कम हुई है, लेकिन गर्मी के मौसम में बिक्री बढ़ने से कुछ राहत मिलती है. बिजली की अनियमित आपूर्ति भी ‘देशी फ्रिज’ की मांग बढ़ने की एक बड़ी वजह बन रही है. ऐसे में कम खर्च में ठंडा पानी पाने के लिए लोग फिर से पारंपरिक विकल्पों की ओर लौट रहे हैं.

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Author: VISHAL KUMAR

VISHAL KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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