Nawada News: नवादा कोर्ट के रिकॉर्ड रूम से रोह थाना कांड संख्या 93/1996 (स्टेट बनाम हारो राम) की मूल एफआईआर, चार्जशीट और केस डायरी गायब होने के दावे के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकारी धन के कथित गबन से जुड़ा यह मामला हमेशा के लिए समाप्त हो गया है. कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि न्यायालय का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, तब भी विधिक प्रक्रिया के तहत कुछ परिस्थितियों में दस्तावेजों का पुनर्निर्माण (री-कंस्ट्रक्शन) और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर आगे की कार्रवाई संभव हो सकती है.
थाने और पुलिस रिकॉर्ड से मिल सकते हैं दस्तावेज
विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी मामले की मूल एफआईआर न्यायालय के रिकॉर्ड से उपलब्ध नहीं है, तो संबंधित थाना और पुलिस कार्यालय के अभिलेखों में उस कांड संख्या से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध हो सकते हैं. ऐसे रिकॉर्ड आगे की कानूनी प्रक्रिया में सहायक बन सकते हैं.
री-कंस्ट्रक्शन ऑफ रिकॉर्ड्स का है प्रावधान
कानूनी प्रावधानों के अनुसार यदि किसी मामले का न्यायालयी रिकॉर्ड नष्ट या गायब हो जाए, तो सक्षम न्यायालय उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर रिकॉर्ड के पुनर्निर्माण (Reconstruction of Records) की प्रक्रिया शुरू कराने का आदेश दे सकता है. इसके लिए संबंधित विभागों से उपलब्ध दस्तावेज मंगाए जा सकते हैं.
आरटीआई के जरिए भी मांगी जा सकती है जानकारी
सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत कोई भी नागरिक संबंधित विभागों से मामले से जुड़ी उपलब्ध सूचनाएं मांग सकता है. यदि विभागीय रिकॉर्ड में प्रासंगिक जानकारी उपलब्ध हो, तो उसकी प्रमाणित प्रति प्राप्त की जा सकती है, जिसका उपयोग आगे की कानूनी प्रक्रिया में किया जा सकता है.
न्यायालय के आदेश का किया जा रहा उल्लेख
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित न्यायालय ने मामले को साक्ष्यों के अभाव में 'साइन डाई' (अनिश्चितकाल के लिए स्थगित) रखा था, न कि अंतिम रूप से समाप्त किया था. हालांकि, किसी भी मामले के पुनर्जीवित होने या दोबारा सुनवाई शुरू होने का अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालय ही उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के आधार पर करेगा.
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