Nawada News: अरवल जिले के सिविल सर्जन डॉ. राजकिशोर प्रसाद के साथ 17 जुलाई को हुई मारपीट और हिंसा की घटना के विरोध में बुधवार को अनुमंडलीय अस्पताल रजौली में चिकित्सकों ने ओपीडी सेवा का बहिष्कार किया. बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के आह्वान पर सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक ओपीडी पूरी तरह बंद रही. इससे दूर-दराज से इलाज कराने पहुंचे दर्जनों मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा.
राज्यव्यापी विरोध के तहत ठप रही ओपीडी
अस्पताल परिसर में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा. अस्पताल के प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. दिलीप कुमार, डॉ. गुलाम अनीष, डॉ. परितोष, डॉ. निवेदिता नंदनी, डॉ. सूरज कुमार, डॉ. श्यामनंदन प्रसाद तथा डीएनएम सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी पर मौजूद रहे, लेकिन संघ के निर्देशानुसार ओपीडी में मरीजों का इलाज नहीं किया गया.
अस्पताल परिसर में पोस्टर और सूचना चस्पा कर बताया गया कि चिकित्सकों पर बढ़ते हमलों के विरोध, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा दोषियों के खिलाफ त्वरित और कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर यह कार्य बहिष्कार किया गया है.
इमरजेंसी सेवा रही सामान्य
प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. दिलीप कुमार ने बताया कि यह विरोध राज्यव्यापी आंदोलन का हिस्सा है. इसका उद्देश्य डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना है. उन्होंने कहा कि आम लोगों की परेशानी को देखते हुए अस्पताल की आपातकालीन (इमरजेंसी) सेवाएं पूरी तरह संचालित की गईं, ताकि गंभीर मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और उन्हें समय पर उपचार मिल सके.
मरीजों को हुई परेशानी
ओपीडी बंद रहने के कारण इलाज के लिए पहुंचे कई मरीजों और उनके परिजनों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा. मरीजों ने बताया कि उन्हें इलाज के लिए लंबा सफर तय कर अस्पताल पहुंचना पड़ा, लेकिन ओपीडी बंद रहने से उन्हें बिना उपचार लौटना पड़ा. वहीं अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि विरोध केवल ओपीडी सेवा तक सीमित रहा और आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं पहले की तरह जारी रहीं.
