प्रशासन की कार्रवाई का नहीं असर
नवादा सदर : शहर से अतिक्रमण को हटाने और 40 फुट चौड़ी खुरी पुल को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराने का असर अब नहीं दिख रहा है. पुल के दोनों छोर पर अवैध वाहन पड़ाव के कारण हमेशा जाम की समस्या से लोगों को जूझना पड़ रहा है. जिला प्रशासन की ओर से फुटपाथी दुकानदारों व ऑटो स्टैंड को विस्थापित करने की फिलहाल कोई योजना नहीं होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
प्रशासन की ओर से अभियान चलाकर पूरे शहर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गयी थी. अतिक्रमण हटाने का अभियान खुरी नदी पुल पर भी चला, परंतु कुछ दिनों बाद ही फिर से अतिक्रमणकारी पुल के फुटपाथ पर कब्जा कर लिया. दुकानदारों द्वारा फुटपाथ पर दुकान खोले जाने के कारण पैदल यात्रियों को पुल पार करने में काफी परेशानी होती है. भीड़ भाड़ के कारण पुल पर पैदल यात्री दुर्घटना के शिकार भी हो जाते हैं. पुल के दोनों साइड फुटपाथ पर दुकानदारों का कब्जा तो हैं ही, इसके बाद फुटपाथ से आगे सड़क भी दुकानदारों के कब्जे में होती है.
अवैध वाहन पड़ाव जाम का कारण : नवादा से अकबरपुर, नेमदारगंज, फरहा के लिए खुलने वाले ऑटो का अवैध पड़ाव खुरी नदी पुल का दक्षिणी छोर ही है. पुल के किनारे व पुल पर से यात्रियों को बैठाने और उतारने के कारण जाम की समस्या उत्पन्न होती है. लगभग दो दर्जन ऑटो इसी स्थान से खुलते हैं. इसके कारण आने जाने वाले वाहन व पैदल यात्री जाम का शिकार होते हैं.
अभियान का नहीं दिखा असर: पुल को अतिक्रमणमुक्त बनाकर सुगम रास्ता बनाने को लेकर प्रशासन की ओर से दो माह पहले ही पूरे शहर के साथ ही खुरी नदी पुल पर से भी अतिक्रमण हटाया गया था. अभियान के कुछ दिन बाद ही फिर से फुटपाथी दुकानदार दुकान व ठेला लगाना शुरू कर दिया. इससे सबसे बुरा असर पैदल यात्रियों पर पड़ता है. खासकर महिलाओं व स्कूली वाहनों को पार करने में परेशानी होती है. जाम के दौरान स्कूली बच्चे सबसे ज्यादा परेशान होते हैं.
विस्थापित करने की नहीं है कोई योजना : प्रशासन की ओर से ऐसे फुटपाथी दुकानदारों व ऑटो स्टैंड को किसी दूसरे स्थान पर विस्थापित करने की कोई योजना नहीं है. प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान हटाये गये दुकानदारों के समक्ष काफी मुश्किल समस्या उतपन्न हो गयी. उनके समक्ष खाने के लाले पड़ गये. दुकानदारों का कहना है कि अन्यत्र कहीं स्थान नहीं मिलता है, तो दुकान कहां लगाउं, परिवार का भरण-पोषण इसी से होता है.
