पगडंडी के सहारे गुजर रही जिंदगी नारोमुरार गांव के लोगों के काफी प्रयास के बाद भी नहीं बनी सड़कफोटो-8प्रतिनिधि, वारिसलीगंज प्रखंड के नारोमुरार गांव के लोग पगडंडी से चल कर ही प्रखंड मुख्यालय पहुंच रहे हैं. काफी प्रयास के बाद भी इस गांव को जोड़ने के लिए सड़क की सुविधा नहीं मिल पायी है. वारिसलीगंज शहर से नारोमुरार की दूरी करीब छह किलोमीटर है. ढाई हजार की जनसंख्या वाले इस गांव के बच्चों को भी पढ़ाई के लिए वारिसलीगंज जाना पड़ता है. हालांकि, गांव के लोगों ने सड़क बनवाने के लिए अपनी तरफ से काफी प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली. सड़क निर्माण को लेकर नारोमुरार से पहले माफी गांव में जमीनी अड़चने पैदा कर अवरोध उत्पन्न किया गया़ नतीजतन विवाद के बाद जो निर्माण कार्य रूका वह अब फाइलों में दब कर दम तोड़ रहा है. तत्कालीन विधायक रामरतन प्रसाद सिंह उर्फ भाईजी ने वर्ष 1978 में नहर से होते हुए नारोमुरार गांव तक सड़क निर्माण का मिट्टी कार्य कराया था. पुन: वर्ष 1981-82 में विधायक बंदी शंकर सिंह ने पक्कीकरण करा सड़क की सूरत बदली. परंतु उसके बाद मौजूदा समय तक सड़क के साथ ग्रामीणों को एक तारण हार का इंतजार है.बोले ग्रामीण सड़क की परेशानी से गांवावाले काफी दिनों से जूझ रहे हैं. जनप्रतिनिधियों का ध्यान नहीं है. सड़क की स्थिति जर्जर होने से यहां के लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित हो जाते हैं. कौशल सिंह, नारोमुरारसड़क के अभाव में बच्चों की शिक्षा की स्थिति बदतर हो रही है. चाह कर भी समय से विद्यालय नहीं पहुंच रहे हैं. लेकिन हमारा दर्द को कोई सुनने वाला नहीं है. राधे सिंह, नारोमुरारप्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना भी यहां फेल हो गयी है. 30 वर्ष पहले इस सड़क का निर्माण शुरू हुआ लेकिन, यह राजनीति रंजिश ही कहा जायेगा कि नारोमुरार सड़क पर गौर नहीं फरमाया गया. कुमार आनंद उर्फ टुन्नी, नारोमुरार
पगडंडी के सहारे गुजर रही जिंदगी
पगडंडी के सहारे गुजर रही जिंदगी नारोमुरार गांव के लोगों के काफी प्रयास के बाद भी नहीं बनी सड़कफोटो-8प्रतिनिधि, वारिसलीगंज प्रखंड के नारोमुरार गांव के लोग पगडंडी से चल कर ही प्रखंड मुख्यालय पहुंच रहे हैं. काफी प्रयास के बाद भी इस गांव को जोड़ने के लिए सड़क की सुविधा नहीं मिल पायी है. वारिसलीगंज […]
