नवादा: नसबंदी के बाद बेड नहीं मिला तो जमीन पर लिटाईं 10 महिलाएं, मेसकौर अस्पताल की व्यवस्था पर उठे सवाल

नवादा के मेसकौर अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली सामने आई. नसबंदी ऑपरेशन के बाद 10 महिलाओं को बेड न मिलने पर फर्श पर लिटाना पड़ा. इस घटना ने सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

Nawada News: नवादा के मेसकौर अस्पताल में शुक्रवार को स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली सामने आई. नसबंदी ऑपरेशन के बाद 10 महिलाओं को अस्पताल में बेड नहीं मिला तो उन्हें ऑपरेशन थियेटर के बाहर बरामदे में जमीन पर लिटाना पड़ा. महिलाओं को करीब दो घंटे तक जमीन पर ही रहना पड़ा. अस्पताल की इस व्यवस्था को लेकर मरीजों के परिजनों में नाराजगी देखी गई.

बताया गया कि शुक्रवार को अस्पताल की दूसरी मंजिल पर स्थित ऑपरेशन थियेटर में 10 महिलाएं नसबंदी कराने पहुंची थीं. ऑपरेशन के बाद जब उन्हें वार्ड में ले जाने की बारी आई तो अस्पताल प्रशासन की ओर से बताया गया कि कोई बेड खाली नहीं है. इसके बाद परिजनों ने महिलाओं को OT के बाहर बरामदे में जमीन पर लिटा दिया.

ऑपरेशन के बाद जमीन पर लेटीं महिलाएं

नसबंदी ऑपरेशन के बाद महिलाओं को आराम और निगरानी के लिए बेड की जरूरत थी, लेकिन मेसकौर अस्पताल में पर्याप्त बेड उपलब्ध नहीं थे. इसके कारण ऑपरेशन के बाद 10 महिलाओं को OT के बाहर बरामदे में जमीन पर लिटाया गया.

परिजनों के अनुसार, महिलाओं को करीब दो घंटे तक इसी स्थिति में रहना पड़ा. अस्पताल प्रशासन की ओर से सभी महिलाओं को एक-एक कंबल उपलब्ध कराया गया.

बेड खाली नहीं होने की दी गई जानकारी

महिलाओं के परिजनों ने जब इस व्यवस्था पर सवाल उठाया तो उन्हें बताया गया कि अस्पताल में कोई बेड खाली नहीं है. परिजनों का कहना था कि ऑपरेशन के बाद महिलाओं को जमीन पर लेटाने से उन्हें काफी परेशानी हुई.

अस्पताल की व्यवस्था को लेकर परिवार के सदस्यों में नाराजगी भी देखने को मिली.

अस्पताल में सिर्फ छह बेड उपलब्ध

चिकित्सा प्रभारी डॉ. सुबीर कुमार ने बताया कि मेसकौर अस्पताल में कुल छह बेड हैं. शुक्रवार को अस्पताल में 10 से अधिक मरीज भर्ती थे. स्थिति ऐसी थी कि कुछ बेड पर एक साथ दो मरीजों को भी रखना पड़ा.

उन्होंने स्वीकार किया कि नसबंदी कराने आई महिलाओं को ऑपरेशन के बाद बेड नहीं मिल पाना अफसोसजनक है.

अधिकारियों को भेजा जाएगा प्रस्ताव

चिकित्सा प्रभारी ने बताया कि अस्पताल में बेड की संख्या बढ़ाने के लिए उच्च अधिकारियों को लिखा जाएगा. उनका कहना है कि अस्पताल में मरीजों की संख्या को देखते हुए अतिरिक्त बेड की जरूरत है.

शुक्रवार की घटना ने एक बार फिर छोटे सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों और मरीजों की संख्या के बीच के अंतर को सामने ला दिया है. सवाल यह है कि ऑपरेशन के बाद मरीजों के लिए पर्याप्त बेड और निगरानी की व्यवस्था कब तक सुनिश्चित हो पाएगी.

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By विशाल कुमार

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