Nalanda News (अमर वर्मा की रिपोर्ट): ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर बुधवार को नालंदा जिला औषधि विक्रेता संघ द्वारा आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का जिले में व्यापक असर देखने को मिला. इस बंद के समर्थन में जिले की सभी थोक एवं खुदरा दवा दुकानें पूरी तरह बंद रहीं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा.
50 लाख रुपये का कारोबार हुआ प्रभावित
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि एक दिवसीय हड़ताल के कारण जिले में करीब 50 लाख रुपये का दवा कारोबार प्रभावित हुआ है. संघ के अध्यक्ष अमरेंद्र कुमार ने बताया कि देश में दवा का व्यापार ड्रग एक्ट के कड़े नियमों के तहत संचालित होता है, जिसमें योग्य डी.फार्मा और बी.फार्मा डिग्री धारकों की मौजूदगी में ही दवाओं का रख-रखाव और बिक्री सुनिश्चित की जाती है.
ऑनलाइन दवा आपूर्ति का किया विरोध
अमरेंद्र कुमार ने बताया कि कोरोना काल के दौरान सरकार ने ऑनलाइन दवा आपूर्ति की अनुमति देने वाले दो नोटिफिकेशन जारी किए थे. लेकिन कोरोना काल समाप्त होने के बाद भी इन्हें रद्द नहीं किया गया, जिसके विरोध में देशभर के दवा विक्रेताओं ने हड़ताल की.
नकली दवाओं की बिक्री पर जताई चिंता
संघ के अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन दवा व्यापार के माध्यम से बाजार में नकली दवाओं की आमद बढ़ गई है. बिना वैध डॉक्टर के पर्चे या फर्जी प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर दवाएं भेजी जा रही हैं, जिससे मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा है. उन्होंने कहा कि शेड्यूल एच-1 श्रेणी की दवाएं भी ऑनलाइन बिना किसी रोक-टोक के उपलब्ध कराई जा रही हैं.
पक्का बिल लेकर दवा खरीदने की अपील
दवा विक्रेताओं ने भारी छूट पर बेची जा रही दवाओं की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाए. संघ ने आम लोगों से अपील की कि वे अपनी सुरक्षा के लिए केवल उन्हीं दुकानों से दवाएं खरीदें, जो पक्का बिल देते हों. विक्रेताओं ने सरकार से ऑनलाइन दवाओं से जुड़े नोटिफिकेशन को रद्द करने की मांग की.
कई दवा व्यवसायी रहे मौजूद
इस मौके पर रणवीर कुमार सिन्हा, ज्योति कुमार, विनोद कुमार, संतोष कुमार, धनंजय कुमार, वीरेंद्र कुमार, नीरज कुमार, निहाल आलम, अनुज कुमार, मुकेश कुमार और शिव कुमार प्रसाद समेत कई दवा व्यवसायी मौजूद रहे.
