बिहारशरीफ : त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में निर्वाचित प्रतिनिधियों व अधिकारियों के बीच समन्वय का अभाव व आपसी खींचतान का खामियाजा आखिरकार आम लोगों को भुगतना पड़ता है.
इससे विकास कार्य बूरी तरह प्रभावित होता रहा है. इसी तरह की स्थिति जिले के उच्च सदन जिला पर्षद में बन गयी है. इसका खुलासा स्वयं जिला पर्षद अध्यक्ष सुनीता देवी ने बयान जारी कर किया है.
अध्यक्ष ने मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सह डीडीसी के रवैये पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि बार-बार संसूचित किये जाने के बाद भी नियमों की अनदेखी कर बिना जिला पर्षद के सदन के अनुमोदन के खर्च किया जा रहा है. जबकि वर्ष 2015-16 का वार्षिक बजट सदन से पारित नहीं किया जा रहा है.
बजट पारित नहीं होने की वजह से जिला परिषद कर्मियों का वेतन भुगतान व विकास कार्य बाधित हो गया है. वेतन भुगतान नहीं होने से मायूस कर्मचारियों ने 18 मई से हड़ताल पर चले गये हैं.
बिहार लेखा नियमावली के अनुसार वित्तीय वर्ष शुरू होने के पूर्व आय-व्यय का बजट बनाना तथा उसे सदन में पारित कराने का प्रावधान है तथा उसी अनुरूप कर्मचारियों का वेतन भुगतान एवं विकास कार्यो का संचालन किया जाता है. इस नियमावली के तहत बिना बजट पारित किये किसी भी तरह का खर्च करना न्यायसंगत नहीं है.
उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की हड़ताल के मद्देनजर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी को नौ मई 2015 एवं 18 मई 2015 को पत्र के माध्यम से निर्देश दिया गया है कि शीघ्र बजट पारित करा कर कर्मियों का वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाय. बावजूद अब तक इसके लिए कोई पहल नहीं की गयी है.
