कानून की अनदेखी कर बच्चों से लिया जा रहा काम

बाल श्रम उन्मूलन का सपना रहा अधूरा प्रशासन का बाल श्रम के नियंत्रण के प्रयास का नहीं दिख रहा असर बिहारशरीफ : जिले में बाल श्रम से मुक्ति दिलाने के लिए प्रशासन द्वारा की गई पहल का कोई खास असर नहीं दिख रहा है. बाल श्रम उन्मूलन के लिए लागू कानून का सख्ती से लागू […]

बाल श्रम उन्मूलन का सपना रहा अधूरा
प्रशासन का बाल श्रम के नियंत्रण के प्रयास का नहीं दिख रहा असर
बिहारशरीफ : जिले में बाल श्रम से मुक्ति दिलाने के लिए प्रशासन द्वारा की गई पहल का कोई खास असर नहीं दिख रहा है. बाल श्रम उन्मूलन के लिए लागू कानून का सख्ती से लागू नहीं किये जाने का परिणाम है कि बाल श्रमिक आज भी होटल, ढ़ावा, चिमनी भट्टा,कचरा संग्रह,भवन निर्माण सहित अन्य खतरनाक औद्योगिक संस्थानों में कार्य करते आसानी से देखे जाते हैं.
बाल श्रमिक कल्याण के लिए जिले में सरकारी व गैर सरकारी कई संगठन कार्य कर रहे हैं. परंतु इच्छा शक्ति का अभाव एवं इसके लिए बने कानूनों को कड़ाई से लागू नहीं किये जाने की वजह से इस कार्य में अपेक्षित सफलता नहीं मिली है. बाल श्रमिक अधिनियम, 1986 के तहत बाल श्रमिकों के लिए 15 पेशा एवं 75 प्रक्रिया को खतरनाक नियोजन घोषित किया गया है. दस अक्तूबर 2006 से घरेलू नौकर, ढ़ावा, होटल,मोटर,जलपान गृह एवं मनोरंजन गृह में बाल श्रमिकों के नियोजन पर रोक लगा दिया गया है.
इस कानून उल्लंघन कर 14 वर्ष के बच्चों को नियोजित करने वालों पर कम से कम तीन माह अधिकतम एक वर्ष का कारावास एवं अधिकतम 20 हजार रुपये जुर्माना का प्रावधान किया गया है. साथ हीं बाल श्रमिकों को मुख्य धारा में लाने के लिए विशेष श्रमिक विद्यालय का संचालन करने की व्यवस्था की गई है. बावजूद बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई पर अंकुश नहीं लगाया जा सका है. लोगों का कहना है कि बाल श्रम उन्मूलन में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने का प्रमुख कारणों में अभिभावकों में जागरूकता की कमी, गरीबी, बिचौलियों की भूमिका एवं बाल श्रमिकों के पुनर्वास के लिए अपर्याप्त व्यवस्था शामिल हैं.
रोजगार दिलाने में मनरेगा विफल
मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए सरकार द्वारा लागू मनरेगा योजना को जिले के मजदूरों को रोजगार दिलाने में अपेक्षित सफलता नहीं मिली है. इस योजना के कार्य में मजदूर की जगह मशीन से काम लेने, फर्जी जॉब कार्ड के आधार पर योजना राशि की दुरूपयोग व वास्तविक जॉब कार्डधारियों को रोजगार के अवसर नहीं मिलने व मजदूरी का नियमित भुगतान नहीं मिलने जैसे शिकायतें अक्सर आती रही हैं.
जिला प्रशासन द्वारा जांच के बाद दोषियों को चिह्न्ति कर कार्रवाई भी की गई है, परंतु यह कार्रवाई योजना के उद्देश्य को हासिल करने में नाकाफी साबित हुआ है. पिछले एक वर्ष में पर्याप्त राशि के अभाव में योजना के क्रियान्वयन में बाधा आयी है.
इस योजना के तहत वर्ष 2014 के पुनरीक्षण के बाद कुल 3,46,345 बीपीएल परिवारों के कुल 3,97,503 लोगों को जॉब कार्ड बनाया गया है.
इनमें अधिकांश जॉब कार्डधारियों के खाते भी खोलवाये जा चुके हैं. परंतु वर्ष 2014-15 में निर्धारित मानव दिवस सृजन का लक्ष्य 27.040 लाख के विरुद्ध महज 17.843 लाख मानव दिवस का सृजन किया जा सका है. वहीं 22.250 फीसदी बीपीएल परिवार के जॉब कार्डधारियों को ही रोजगार उपलब्ध कराया जा सका है.
‘‘ बाल श्रम उन्मूलन के लिए जिला प्रशासन द्वारा धावा दल का गठन कर छापेमारी का कार्य किया जा रहा है. बाल श्रमिकों के लिए संवेदनशील क्षेत्रों का चयन कर वहां जागरूकता अभियान चलाने के साथ हीं निगरानी की व्यवस्था की गई है. पिछले दिनों 37 बाल श्रमिकों को मुक्त कर नियोजकों पर कार्रवाई की गई है.’’
विजय कुमार, श्रमाधीक्षक , नालंदा

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