बिहारशरीफ : हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का दिन खास होता है. यह हर साल वैशाख महीने में शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि को मनाया जाता है. इस साल 18 अप्रैल को मनाया जायेगा. अक्षय तृतीया को लेकर सुहागिन महिलाओं में काफी उत्साह है. वहीं, बाजार में चहल-पहल बढ़ गयी है. ऐसी मान्यता है कि इस […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
बिहारशरीफ : हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का दिन खास होता है. यह हर साल वैशाख महीने में शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि को मनाया जाता है. इस साल 18 अप्रैल को मनाया जायेगा. अक्षय तृतीया को लेकर सुहागिन महिलाओं में काफी उत्साह है. वहीं, बाजार में चहल-पहल बढ़ गयी है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन शुभ काम करने पर अक्षय फल मिलता है.
सुहागिन महिलाएं परिवार की समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं. अक्षय तृतीया के अवसर पर भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने की परंपरा है. इस दिन सोना खरीदने का प्रचलन है. इस संबंध में प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीकांत शर्मा ने कहा कि अक्षय तृतीया कई कारणों से शुभ माना गया है. पुराणों के अनुसार, इसी दिन से सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी. भगवान विष्णु का नर-नारायण और द्रयग्रीव अवतार भी इसी दिन हुआ था. ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का जन्म तथा मां गंगा का पृथ्वी पर आगमन भी इसी दिन हुआ था. इसी दिन बद्रीनाथ का कपाट भी खुलता है.
18 को मनाया जायेगा अक्षय तृतीया व्रत महिलाओं में उत्साह
अक्षय तृतीया व्रत का विधान
पंडित श्रीकांत शर्मा ने बताया कि 18 अप्रैल की सुबह 5:56 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त्त है. भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए. धूप-दीप, अक्षत, पुष्प आदि के साथ नौवेद्य के रूप में जौ, गेहूं, सत्तू, ककड़ी, चने का दाल, ऋतु फल आदि अर्पित करना चाहिए. संभव हो तो ब्राह्मणों को भोजन कराएं.
शुरू हो जायेगा शुभ लग्न
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 18 अप्रैल को शनि वक्री होंगे. इसके साथ ही सूर्य तथा चंद्र गोचर में उच्च हो जायेंगे. इस दिन कृतिका नक्षत्र में आयुष्मान, सिद्धि और स्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत संयोग बन रहा है. यह संयोग शादी और खरीदारी के लिए शुभ है. इसके पूर्व मीन संक्रांति का मलमास होने से 14 अप्रैल तक शुभ मुहूर्त नहीं है.
मलमास के दौरान भी शुभ कार्य नहीं होंगे. मलमास के पहले 12 मई तक शुभ लगन है, जिनमें शादियां संपन्न होंगी.