शराबबंदी से स्वस्थ व समृद्ध हुआ परिवार

कई रोगों के मरीजों की संख्या में आयी कमी बिहारशरीफ : शराबबंदी के दो साल हो गये. इसका समाज पर बेहतर प्रभाव पड़ा है़ शराब पीने से होनेवाली गंभीर बीमारियों के मरीजों की संख्या घटी है़ इससे परिवार स्वस्थ हुआ और इलाज पर मोटी रकम खर्च नहीं होने से आर्थिक स्थिति भी सुधरी़ शराबबंदी के […]

कई रोगों के मरीजों की संख्या में आयी कमी

बिहारशरीफ : शराबबंदी के दो साल हो गये. इसका समाज पर बेहतर प्रभाव पड़ा है़ शराब पीने से होनेवाली गंभीर बीमारियों के मरीजों की संख्या घटी है़ इससे परिवार स्वस्थ हुआ और इलाज पर मोटी रकम खर्च नहीं होने से आर्थिक स्थिति भी सुधरी़ शराबबंदी के बाद कई रोगों के मरीजों की संख्या में अपेक्षाकृत काफी कमी आयी है. अस्पताल में पिछले साल की तुलना में कम मरीज आये़ यक्ष्मा, किडनी में गड़बड़ी समेत अन्य गंभीर रोगों के मरीजों की संख्या में निरंतर गिरावट आयी है. इतना ही नहीं दुर्घटनाओं में भी कमी आयी है.
टीबी के मरीजों की संख्या घटी : शराबबंदी यक्ष्मा रोगियों के लिए भी वरदान साबित हो रही है. शराबबंदी के बाद इसके रोगियों की संख्या में कमी आयी है. साथ ही पीड़ित के इलाज में भी आसानी होती है. जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ रवींद्र कुमार ने बताया कि शराब नहीं पीने से रोगियों में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है. इससे रोगी जल्द ठीक होते हैं. शराबबंदी के बाद यक्ष्मा (टीबी) का संक्रमण भी घटा है.
शराबबंदी स्वास्थ्य के लिए अच्छा साबित हो रही है. शराबबंदी के बाद कई रोगों के मरीजों की संख्या में कमी आयी है. लिवर, किडनी, यक्ष्मा रोगों के मरीजों की संख्या में पहले की तुलना में कमी आयी है.
डॉ सुबोध प्रसाद सिंह, सिविल सर्जन, नालंदा
नशामुक्ति केंद्र में कम
आ रहे हैं मरीज
2016 में शराबबंदी के बाद नशेड़ियों के इलाज के लिए सदर अस्पताल में नशामुक्ति केंद्र खोला गया था. अप्रैल, 2016 से लेकर 26 मार्च, 2018 तक 437 नशेड़ियों का इलाज किया गया. इसमें 72 लोगों को भर्ती किया गया. यह केंद्र सभी सुविधाओं से लैस है. केंद्र में एक डॉक्टर पदस्थापित हैं. इसके अलावा पांच एएनएम, आठ चतुर्थवर्गीय कर्मचारी, एक लिपिक व एक डाटा ऑपरेटर कार्यरत हैं. इस केंद्र में 10 बेड लगे हुए हैं.

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