दो पत्नियों के फेर में पड़ा युवक, सरे बाजार हुई रुसवाई, परिजनों ने पीटा

सिलाव (नालंदा) : सिलाव बाइपास पर दो महिलाएं एक युवक को अपनी-अपनी ओर खींच रही थीं. युवक की बोलती बंद थी. कभी इधर तो कभी वह खिंचता चला जाता. यह खेल करीब एक घंटे से ऊपर चला. इस दौरान दोनों महिलाओं के परिजनों ने युवक की जमकर पिटाई भी कर दी. वहीं, इस नजारे को […]

सिलाव (नालंदा) : सिलाव बाइपास पर दो महिलाएं एक युवक को अपनी-अपनी ओर खींच रही थीं. युवक की बोलती बंद थी. कभी इधर तो कभी वह खिंचता चला जाता. यह खेल करीब एक घंटे से ऊपर चला. इस दौरान दोनों महिलाओं के परिजनों ने युवक की जमकर पिटाई भी कर दी. वहीं, इस नजारे को जो देखता वही उत्सुकता खड़ा हो जाता. धीरे-धीरे वहां लोगों की काफी भीड़ एकत्रित हो गयी. भीड़ में शामिल कुछ लोग हंस रहे थे तो कुछ युवक की पिटाई पर अफसोस भी प्रकट कर रहे थे.

क्या था मामला: सिलाव के मितावां गांव के महादलित टोला निवासी हरीश कुमार ने दो शादियां की हैं. हरीश की एक पत्नी बेन थाने के मिरचाइगंज की है तो दूसरी पत्नी पश्चिम बंगाल के आसनसोल की. सोमवार को हरीश सिलाव बाजार करने आया था. वहां से घर लौटते वक्त सिलाव बाईपास में दोनों पत्नियां मिल गयीं.
अपने पति को देख दोनों पत्नियां काफी खुशी हुईं और होली को लेकर दोनों उसे अपने-अपने मायके ले जाने के प्रयास में जुट गयीं. लेकिन, हरीश दोनों पत्नियों में से किसी के मायके जाने को तैयार नहीं था. हरीश के साथ जाने से इन्कार करने पर दोनों पत्नियों ने उसकी बांह पकड़ ली और अपनी-अपनी ओर खिंचने लगी. हरीश निरीह प्राणी की तरह बीच में फंसा रहा. दोनों पत्नियां अपने पति को छोड़ने के मूड में नहीं थी. एक पत्नी दायां हाथ पकड़ कर तो दूसरी पत्नी बायां हाथ पकड़ अपनी ओर खिंच रही थी. बेचारा बना हरीश कभी इस ओर तो कभी उस ओर खिंचता चला जा रहा था.
पत्नियों के परिजनों ने की जमकर धुनाई
बीच बाजार यह ड्रामा एक घंटा से ऊपर चलता रहा. हरीश निर्णय नहीं कर पा रहा था कि वह किसके साथ जाये, किसके साथ न जाये. सरेआम इस रुसवाई से वह मर्माहत भी था. हरीश को साथ नहीं चलता देख पत्नियों के परिजनों ने अपना आपा खो दिया और उसकी जमकर धुनाई कर दी. पत्नी के परिजनों से पिटाई के बाद बेचारा हरीश लोगों की भीड़ में रोता-बिलखता रहा. आखिरकार इस घटना की सूचना सिलाव थाने की पुलिस को मिली. लेकिन, पुलिस जब तक मौके पर पहुंचती, दोनों महिलाओं के परिजन वहां से जा चुके थे. बेचारा हरीश वहीं सिर पकड़कर बैठ गया. उपस्थित लोग तरह-तरह की बातें करते रहे. कोई कहता कि जैसी करनी, वैसी भरनी, तो कोई कहता दो शादी करनेवालों को तो यह होना ही है.

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