सरकारी सेवकों पर लगे आरोपों की जांच की प्रक्रिया होगी पारदर्शी

सरकारी सेवकों पर लगे आरोपों की जांच की प्रक्रिया होगी पारदर्शी

वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर

बिहार सरकार ने सरकारी कर्मचारियों पर लगने वाले गंभीर आरोपों की जांच प्रक्रिया को और पारदर्शी व त्रुटिरहित बनाने के लिए नया निर्देश जारी किया है. इसके तहत विभागाध्यक्ष से लेकर जिलाधिकारी तक को कड़े दिशानिर्देश दिए गए हैं, ताकि सच्चाई सामने लाने वाली कार्रवाई सही निगरानी में पूरी की जा सके. इसी उद्देश्य से मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय का गठन भी किया गया है. साल 2005 में बने बिहार सरकारी सेवक नियमावली के नियम 17 में यह तय किया गया है कि अगर किसी सरकारी कर्मचारी पर गंभीर सज़ा (वृहद शास्ति) लगानी है, तो उसकी प्रक्रिया अब और साफ और व्यवस्थित तरीके से होगी. इसको लेकर सामान्य प्रशासन विभाग के मुख्य जांच आयुक्त द्वारा विभाग के प्रधान, विभागाध्यक्ष, प्रमंडलीय आयुक्त व डीएम के लिए दिशा निर्देश जारी किया गया है. उद्देश्य सरकारी सेवक के विरुद्ध गठित आरोपों की सच्चाई जांच के लिए किये जाने वाले कार्रवाई में को त्रुटि रहित समुचित पर्यवेक्षण के साथ की जा सके. इसके लिए मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय का गठन किया गया है.

जांच के दौरान सामने आती यह परेशानियां

पत्र में बताया गया कि जांच आयुक्त और जिला के विभागीय जांच के नोडल पदाधिकारी के साथ बैठक में कुछ कठिनाई सामने आयी. इस कारण जांच में कार्यवाही के प्रभावित होने और विलंबित होने की आशंका बनी रहती है. इसको लेकर कई बार उच्च न्यायालय के समक्ष असुविधाजनक स्थिति हो जाती है.

इन कठिनाइयों में जांच प्रस्ताव में प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी की नियुक्ति संबंधित आदेश संलग्न नहीं होने से जांच शुरू नहीं हो पाती. आरोप की प्रति आरोपी को दी जानी है, लेकिन इसका प्रमाण प्रस्ताव के साथ संलग्न नहीं होता. इसमें आरोपित द्वारा जांच के दौरान उक्त नियम के उल्लंघन का आरोप लगाया जाता है जिससे जांच प्रभावित होने की संभावना रहती है. वहीं ट्रैप के मामलों में साक्ष्य व अभिलेख नहीं उपलब्ध नहीं हो पाता, इस कारण जांच में अनावश्यक विलंब होता है. ट्रैप के कई मामलों में कार्यवाही के समय साक्षी रिटायर हो चुके रहते हैं.

इस तरह परेशानी को करें दूर

इसको लेकर निर्देश दिया गया कि जांच प्रस्ताव कराने के साथ प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी की नियुक्ति संबंधी आदेश आवश्यक रूप से संलग्न करे. आरोपित को आरोप पत्र उपलब्ध कराने की प्राप्ति रसीद जांच अधिकारी को जांच के लिए दें. ट्रैप के मामलों में जांच अधिकारियों को साक्ष्य व अभिलेख उपलब्ध कराने के लिए अपने अधीनस्थ एजेंसी के समन्वय करें और इसे न्यायालय में समर्पित किये जाने से पहले सत्यापित प्रति अपने अधीन संरक्षित रखें. साथ निगरानी विभाग अपने अधीनस्थ इकाइयों को निर्देशित करें कि रिटायर्ड अनुसंधान पदाधिकारियों का डाटाबेस तैयार करें. जांच पदाधिकारी को जांच के आदेश के साथ संलग्न आरोप पत्र से संबंधित त्रुटियों के समाधान से पहले निदेशालय की ओर से जारी निर्देश का पूरा अनुपालन करें.

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Author: KUMAR GAURAV

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