एसकेएमसीएच में मरीजों का सौदा करने वाले सिंडिकेट का भंडाफोड़, 80 हजार तक की डील, जांच शुरू

बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसकेएमसीएच में मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजने का एक सनसनीखेज सिंडिकेट सक्रिय है. अस्पताल के कर्मचारी और बिचौलिए मिलकर गंभीर मरीजों के परिजनों को बरगलाकर मोटी रकम वसूल रहे हैं.

SKMCH Patient Syndicate: उत्तर बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसकेएमसीएच (श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल) में गंभीर मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजने के नाम पर एक बड़े सिंडिकेट के सक्रिय होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. आरोप है कि अस्पताल परिसर में एंबुलेंस चालकों. ट्रॉली मैन. निजी कर्मचारियों और कुछ बिचौलियों का एक मजबूत नेटवर्क काम कर रहा है. यह सिंडिकेट गंभीर मरीजों के परिजनों को बेहतर और त्वरित इलाज का झांसा देकर निजी अस्पतालों व नर्सिंग होम में भेज देता है. इसके बदले प्रति मरीज 25 हजार से लेकर 80 हजार रुपये तक की भारी-भरकम डील होने की बात सामने आई है. मामले के उजागर होने के बाद स्वास्थ्य महकमे और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है.

हादसे के शिकार और गर्भवती महिलाएं आसान निशाना

सड़क दुर्घटना या गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को अस्पताल पहुंचते ही यह नेटवर्क बरगलाकर निजी अस्पतालों की ओर शिफ्ट कर देता है. कई मामलों में लावारिस या बिना परिजनों के पहुंचे मरीजों को जब पुलिस अस्पताल लाती है. तो उन्हें भी चुपके से निजी अस्पतालों में भेज दिया जाता है. चौंकाने वाला आरोप है कि ऐसे मरीजों का नाम और उन्हें ले जाने वाली एंबुलेंस का नंबर एसकेएमसीएच ओपी (पुलिस चौकी) के रजिस्टर में भी दर्ज नहीं किया जाता. 

 व्हाट्सएप चैट और सूची वायरल होने से मची खलबली

मामले का खुलासा तब हुआ जब सोशल मीडिया पर 52 मरीजों और उन्हें ले जाने वाले एंबुलेंस चालकों की एक सूची व्हाट्सएप चैट के साथ वायरल हो गई. इस सूची में एसकेएमसीएच ओपी के एक निजी चालक दीपक कुमार का नाम भी सामने आने के बाद उसकी भूमिका पूरी तरह जांच के दायरे में आ गई है.

40 प्रतिशत तक कमीशन का खेल, एसडीपीओ ने दिए जांच के आदेश

सूत्रों के अनुसार. गंभीर मामलों में निजी अस्पतालों में जमा होने वाले कुल बिल का करीब 40 प्रतिशत तक कमीशन इस सिंडिकेट से जुड़े लोगों को मिलता है. सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल (एमसीएच) में भर्ती गर्भवतियों को भी चिकित्सक की अनुपलब्धता या मरीज की स्थिति गंभीर बताकर निजी नर्सिंग होम भेजा जाता है. जहां सिजेरियन ऑपरेशन के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है. मामला सामने आने के बाद सिंडिकेट से जुड़े लोग मोबाइल चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्य मिटाने में जुट गए हैं. पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए नगर-2 की एसडीपीओ विनीता सिन्हा ने गहन जांच के आदेश दिए हैं. वहीं. स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है.


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By Sumit Kumar

सुमित पत्रकारिता में पिछले 4 वर्षों से सक्रिय। प्रभात खबर के प्रिंट मीडिया के साथ काम करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम से जुड़े हुए हैं। क्राइम, हाईपरलोकल, स्वास्थ्य विभाग व राजनीतिक रिपोर्टिंग में विशेष रुचि और अनुभव रखते हैं। क्षेत्रीय मुद्दों और जनसरोकार की खबरों को सशक्त तरीके से उठाने के लिए जाने जाते हैं।

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