Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) रहते हुए लगातार विवादों और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से घिरे रहे अजय कुमार सिंह के ठिकानों पर आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की हालिया कार्रवाई ने शिक्षा महकमे के भीतर भारी खलबली मचा दी है. प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि यदि ईओयू की प्रारंभिक जांच में काली कमाई का आंकड़ा अपेक्षा से कम निकलता है, तो इसका सीधा संकेत यही होगा कि अवैध रूप से अर्जित संपत्ति का बड़ा हिस्सा पहले ही सुरक्षित व बेनामी संपत्तियों में खपाया जा चुका है.
समर्सिबल व बेंच-डेस्क खरीद में कमीशनखोरी के लगे थे गंभीर आरोप
वर्ष 2023-24 के दौरान बिहार भर के सरकारी विद्यालयों में समर्सिबल लगाने और बेंच-डेस्क आपूर्ति का जिम्मा निजी ठेकेदारों को पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर सौंपा गया था.
विभागीय सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इसी अवधि के दौरान महकमे के कई अधिकारियों की चल-अचल संपत्ति में अकूत इजाफा दर्ज किया गया. मुजफ्फरपुर के तत्कालीन डीईओ अजय कुमार सिंह का नाम इस पूरे खेल में प्रमुखता से उछला था. उन पर शिक्षकों से दुर्व्यवहार के अलावा पारू के तत्कालीन भाजपा विधायक अशोक कुमार सिंह से विवाद के भी आरोप लगे थे, जहां विधायक ने सीधे तौर पर कमीशन न मिलने के कारण ठेकेदारों का भुगतान अटकाए रखने का आरोप लगाया था.
कुढ़नी में प्रधान शिक्षक से मारपीट का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन
अप्रैल 2024 के प्रथम सप्ताह में कुढ़नी प्रखंड के रामपुर करमचंद बलड़ा स्थित एक विद्यालय में घटी घटना ने इस विवाद को अत्यधिक तूल दे दिया था.
आरोप लगा था कि तत्कालीन डीईओ अपने चालकों और लिपिकों के साथ स्कूल पहुंचे थे, जहां कमीशन की मांग को लेकर प्रधान शिक्षक के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई थी. इस मामले में थाने में प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी. स्थानीय ग्रामीणों और शिक्षाविदों के कड़े विरोध के बाद मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा, जहां अदालत ने इस पर संज्ञान लिया और यह फिलहाल विचाराधीन है.
तत्कालीन उप मुख्यमंत्री के आदेशों की अनदेखी और पदोन्नति पर उठे सवाल
मई 2025 में तत्कालीन उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने समर्सिबल और डेस्क-बेंच आपूर्ति से जुड़े सभी भुगतानों का पूरा ब्योरा तीन दिनों के भीतर तलब किया था.
इसके बावजूद, समय सीमा बीत जाने के 20 दिनों बाद तक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिस पर एमएलसी बंशीधर ब्रजवासी ने सरकार के आदेशों की खुली अवहेलना का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था. इतने गंभीर आरोपों, शिकायतों और अदालती प्रक्रिया के बीच उक्त अधिकारी को विभाग द्वारा पदोन्नति दिए जाने को लेकर प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं. अब ईओयू की छापेमारी के बाद देखना होगा कि जांच की आंच किस-किस तक पहुंचती है.
