आज से पितृ पक्ष, पितरों का किया जायेगा तर्पण

आज से पितृ पक्ष, पितरों का किया जायेगा तर्पण

पहले दिन अगस्त्य ऋषि को दिया जायेगा पानी उपमुख्य संवाददाता, मुजफ्फरपुर पूर्वजों की आत्मा की शांति व मोक्ष की प्राप्ति के लिए 15 दिवसीय पितृपक्ष की शुरुआत रविवार से होगी. यह 21 सितंबर को अमावस्या के दिन संपन्न होगा. इस दौरान गंगा घाटों व घरों में लोग अपने-अपने पितरों को जल अर्पित कर तर्पण करेंगे. रविवार को अगस्त्य मुनि का अर्घ्यदान होगा. इसी दिन पूर्णिमा श्राद्ध किया जायेगा. सोमवार प्रतिपदा श्राद्ध शुरू होगा. वैदिक काल से चली आ रही परंपरा के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर आश्विन कृष्ण अमावस्या तक पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है. मान्यता है कि इस अवधि में यमराज पितरों को यमपुरी से मुक्त कर देते हैं. वही पृथ्वी पर आकर अपने वंशजों से पिंडदान व जल ग्रहण करते हैं. पितृपक्ष में शुभ कार्य, मांगलिक कार्य वर्जित रहता है. ऐसे करें पितरों का तर्पण पितृपक्ष में प्रतिदिन सुबह स्नान कर तिल, अक्षत, द्रव्य, फूल और कुश लेकर सूर्य के समक्ष पितरों को जल देना चाहिए. भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से लेकर अमावस्या तक की इन 15 दिनों में विशेष तिथियों पर पिंडदान और श्राद्ध करने से पितरों की आत्मा को शांति और वंशजों को सुख-समृद्धि प्राप्त होती है. पूर्वज की मृत्यु पंचांग के अनुसार जिस हिंदी तिथि को हो, उस दिन पिंडदान करने का प्रावधान है. इस दौरान लोग गयाजी और कई पवित्र नदी के तट पर जाकर तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध और दान-पुण्य करते हैं. यदि पूर्वजों की मृत्यु तिथि याद नहीं हो तो अमावस्या को श्राद्ध किया जाता है. पूर्णिमा श्राद्ध -7 सितंबर प्रतिपदा श्राद्ध – 8 सितंबर द्वितीया श्राद्ध – 9 सितंबर तृतीया व चतुर्थी श्राद्ध – 10 सितंबर पंचमी श्राद्ध – 11 सितंबर षष्ठी श्राद्ध – 12 सितंबर सप्तमी श्राद्ध – 13 सितंबर अष्टमी श्राद्ध – 14 सितंबर नवमी श्राद्ध – 15 सितंबर दशमी श्राद्ध – 16 सितंबर एकादशी श्राद्ध – 17 सितंबर द्वादशी श्राद्ध – 18 सितंबर त्रयोदशी श्राद्ध – 19 सितंबर चतुर्दशी श्राद्ध – 20 सितंबर अमावस्या श्राद्ध – 21 सितंबर

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By Vinay Kumar

I am working as a deputy chief reporter at Prabhat Khabar muzaffarpur. My writing focuses on political, social, and current topics.

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