विश्वविद्यालय का गेट बंद होने पर दिन-भर हंगामा, अब दोपहर 2:30 बजे के बाद ही मिलेगा प्रवेश

Now entry will be available only after 2:30 PM

वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर

बीआरए बिहार विश्वविद्यालय का मेन गेट सोमवार को बंद कर दिया गया. जब अपनी मांगों को लेकर अलग-अलग छात्र संघ के बैनर तले काफी संख्या में छात्र पहुंचे तो गेट बंद होने पर जम कर विरोध के साथ हंगामा किया. इस नयी व्यवस्था को लेकर सुबह से शाम तक हंगामा चलता रहा. इस मामले में विश्वविद्यालय की ओर से नयी व्यवस्था लागू की जा रही है. अब विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन का मेन गेट दोपहर 2:30 बजे तक बंद रहेगा. कुलपति प्रो. डीसी राय ने यह फैसला हाल के दिनों में लगातार हो रहे हंगामों को देखते हुए लिया है, जिससे कर्मचारियों के काम में बाधा आ रही थी. नयी व्यवस्था के तहत, दोपहर 2:30 बजे के बाद ही छात्रों को विश्वविद्यालय में प्रवेश दिया जाएगा. एंट्री के लिए छात्रों को अपना पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य होगा. सुरक्षाकर्मी यह भी सुनिश्चित करेंगे कि छात्र किस काम के लिए किस विभाग में जा रहे है. कुलपति ने बताया कि सुबह से दोपहर तक का समय पेंडिंग रिजल्ट, अंकपत्र सुधार, डिग्री और अन्य आवेदनों के निपटान के लिए आरक्षित किया गया है, ताकि कर्मचारी बिना किसी बाधा के अपना काम कर सकें. कुलपति ने बताया कि जिन छात्रों को किसी दस्तावेज की तत्काल आवश्यकता है, वे सुबह विश्वविद्यालय के काउंटर पर अपना आवेदन जमा कर सकते हैं. ऐसे आवेदनों के साथ छात्र को आधार कार्ड और इमरजेंसी का वैध कारण या दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा. नौकरी के लिए इंटरव्यू लेटर या किसी संस्थान में दाखिले का प्रमाण. विश्वविद्यालय उसी दिन शाम तक ऐसे मामलों का निपटान करने की कोशिश करेगा.

सामान्य आवेदन अब सीधे कॉलेजों में

छात्रों को किसी भी सामान्य दस्तावेज जैसे अंकपत्र सुधार, डिग्री, प्रोविजनल, रजिस्ट्रेशन, माइग्रेशन आदि के लिए अब सीधे विश्वविद्यालय आने की जरूरत नहीं होगी. कुलपति के अनुसार, ऐसे सभी आवेदन कॉलेजों में ही जमा किए जाएंगे. कॉलेज प्रशासन सभी आवेदनों को समेकित कर विश्वविद्यालय को भेजेगा, और विश्वविद्यालय सात दिनों के भीतर संबंधित दस्तावेज तैयार करके वापस कॉलेज भेज देगा. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के काउंटर पर केवल प्रतियोगिता परीक्षा फॉर्म, इंटरव्यू या नौकरी से जुड़े आवश्यक दस्तावेजों के लिए ही आवेदन स्वीकार किए जाएंगे, ताकि अति-जरूरी मामलों का तुरंत समाधान हो सके.

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Author: LALITANSOO

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