मुजफ्फरपुर की बूढ़ी गंडक खतरे में, शहरी नदी प्रबंधन योजना में शामिल करने की गुहार

यह नदी स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए आवश्यक है और आजीविका, कृषि और समग्र आर्थिक गतिविधियों का भी समर्थन करती है.

वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर मुजफ्फरपुर शहर की जीवनदायिनी बूढ़ी गंडक नदी और शहर के तालाबों, झीलों का अस्तित्व खतरे में है. शहर के जल संकट को दूर करने और नदियों और जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए नगर आयुक्त विक्रम विरकर ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स के निदेशक को एक पत्र लिखा है. उन्होंने मुजफ्फरपुर को शहरी नदी प्रबंधन योजना (यूआरएमपी) में शामिल करने और जल संसाधन कायाकल्प के लिए तकनीकी सहायता का अनुरोध किया है. शहर की बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों और क्षेत्र में नदी-आधारित संसाधनों की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा करते हुए बताया कि मुजफ्फरपुर, बिहार का दूसरा सबसे बड़ा शहर है और यह बूढ़ी गंडक नदी के किनारे स्थित है. यह नदी स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए आवश्यक है और आजीविका, कृषि और समग्र आर्थिक गतिविधियों का भी समर्थन करती है. हालांकि, तेजी से शहरीकरण और बढ़ते पर्यावरणीय दबावों ने नदी के स्वास्थ्य पर काफी दबाव डाला है. नगर आयुक्त ने कहा कि यूआरएमपी में मुजफ्फरपुर को शामिल करने से प्रदूषण नियंत्रण, सतत विकास, अपशिष्ट जल प्रबंधन और नदी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में रणनीतिक हस्तक्षेप की अनुमति मिलेगी. ऐसे उपाय न केवल शहरवासियों के जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाएंगे बल्कि क्षेत्र के व्यापक पर्यावरणीय स्थिरता लक्ष्यों में भी योगदान देंगे.

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