मुजफ्फरपुर में खाकी शर्मसार: थाने से घूस लेकर छोड़ा बदमाश, ऑडियो वायरल होते ही दारोगा, सिपाही और चौकीदार सस्पेंड

मुजफ्फरपुर के बेनीबाद थाने से शर्मनाक मामला सामने आया है. ग्रामीणों द्वारा पकड़े गए बदमाशों को पुलिसकर्मियों ने रिश्वत लेकर छोड़ दिया. वायरल ऑडियो के बाद कार्रवाई हुई है.

Muzaffarpur Crime News: मुजफ्फरपुर जिले के बेनीबाद थाने में पदस्थापित पुलिसकर्मियों का एक बेहद सनसनीखेज और शर्मनाक कारनामा उजागर हुआ है. स्थानीय ग्रामीणों द्वारा कड़ी मशक्कत के बाद पकड़कर थाने के सुपुर्द किए गए आपराधिक प्रवृत्ति के बदमाशों को पुलिसकर्मियों ने पैसों के लेनदेन के आधार पर गुपचुप तरीके से छोड़ दिया. इस पूरे घूसकांड का खुलासा एक ऑडियो वायरल होने के बाद हुआ. मामले की आधिकारिक जांच रिपोर्ट प्राप्त होते ही वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कांतेश कुमार मिश्र ने त्वरित और कड़ी कार्रवाई की है. एसएसपी ने बेनीबाद थाने के ओडी पदाधिकारी दारोगा मौर्यन दीपांकरण, सिपाही संख्या 636 सौरभ कुमार और चौकीदार गुल्टेन कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.

वायरल ऑडियो से खुली पोल, एसएसपी ने बैठाई थी जांच

घटना के संदर्भ में जानकारी के अनुसार, बेनीबाद थाना क्षेत्र में ग्रामीणों ने कानून पर भरोसा जताते हुए कुछ बदमाशों को पकड़कर सीधे थाने की पुलिस को सौंपा था. लेकिन थाने में तैनात इन कर्मियों ने जनता के भरोसे को तार-तार कर दिया. उन्होंने इस गिरफ्तारी की भनक न तो अपने थानाध्यक्ष को लगने दी और न ही अनुमंडल या जिला स्तर के किसी वरीय पुलिस पदाधिकारी को. पर्दे के पीछे ही सौदेबाजी तय हुई और आरोपियों को पिछले दरवाजे से रिहा कर दिया गया. इस लेन-देन से जुड़ा एक ऑडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, पुलिस महकमे में खलबली मच गई. एसएसपी ने बिना देरी किए एसडीपीओ (पूर्वी-01) अलय वत्स को जांच का जिम्मा सौंपा.

चार्जशीटेड दलाल के जरिए हुई डील, दारोगा का पुराना रिकॉर्ड भी दागदार

एसडीपीओ अलय वत्स द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले साक्ष्य सामने आए. रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि पकड़े गए आरोपियों को बिना किसी वरीय अधिकारी के संज्ञान के छोड़ा गया था. इस पूरे खेल में एक निजी व्यक्ति (बिचौलिए) के जरिए मोटी रकम का लेन-देन हुआ. जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि ऑडियो में जिस बिचौलिए का नाम बार-बार आ रहा है, वह खुद पहले से कई आपराधिक कांडों में चार्जशीटेड अभियुक्त है. एक दागी व्यक्ति से साठगांठ को पुलिस नियमावली का खुला उल्लंघन माना गया. निलंबन पत्र के अनुसार, दारोगा मौर्यन दीपांकरण का आचरण पहले भी संदिग्ध रहा है. काजीमोहम्मदपुर थाने में पदस्थापन के दौरान भी उन्हें लापरवाही में निलंबित किया गया था और ट्रैफिक थाने में तैनाती के समय भी उन पर गंभीर आरोप लगे थे.

थानाध्यक्ष की सीधी संलिप्तता नहीं, ढीली पकड़ पर मांगा जवाब

थानाध्यक्ष धीरेंद्र कुमार सिंह ने बीते 14 अगस्त को ही थाने का पदभार ग्रहण किया था. जांच रिपोर्ट में रिश्वतखोरी के इस खेल में उनकी कोई सीधी भूमिका या संलिप्तता नहीं पाई गई. हालांकि, अपने अधीनस्थ पुलिसकर्मियों पर प्रभावी नियंत्रण न रख पाने और थाने में अनुशासन की कमी के चलते एसएसपी ने उनसे भी स्पष्टीकरण तलब किया है. उनसे पूछा गया है कि उनकी तैनाती के दौरान थाने में इतनी बड़ी मनमानी कैसे संचालित होती रही. एसएसपी की इस कड़ी कार्रवाई से जिले के पुलिस तंत्र में हड़कंप मच गया है और स्पष्ट संदेश दिया गया है कि भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति जारी रहेगी.

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लेखक के बारे में

By Premanshu shekhar

I have 16 years of journalism experience, working as a Bureau Chief at Prabhat Khabar muzaffarpur. My writing focuses on crime,political, social, and current topics.I have experience covering assembly and parliamentary elections reporting.
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