मुजफ्फरपुर से कुमार दीपू की रिपोर्ट
Muzaffarpur News: सदर अस्पताल समेत जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) को आवारा कुत्तों से मुक्त कराने की स्वास्थ्य विभाग की योजना सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई है. सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार के कड़े निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई असर नहीं दिख रहा है. आलम यह है कि आज भी अस्पताल परिसरों और ओपीडी (OPD) में कुत्ते खुलेआम घूमते नजर आते हैं, जिससे इलाज कराने आ रहे मरीजों और उनके परिजनों में हमेशा डर का माहौल बना रहता है.
नोडल अधिकारी बनाने का निर्देश पूरी तरह हुआ फेल
अस्पतालों को ‘स्ट्रीट डॉग’ मुक्त बनाने के लिए सदर अस्पताल से लेकर सभी पीएचसी में नोडल अधिकारी बनाए जाने थे. सिविल सर्जन ने इसके लिए सभी अस्पताल प्रभारियों और एएनएम (ANM) स्कूल के प्राचार्यों को नोडल अधिकारी नियुक्त करने का लिखित निर्देश दिया था. हैरानी की बात यह है कि आदेश के दो महीने बीत जाने के बाद भी कहीं भी नोडल अधिकारियों की नियुक्ति नहीं की जा सकी, जिससे व्यवस्था जस की तस बनी हुई है.
कचरे के कारण जुटते हैं कुत्ते, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं
समीक्षा में यह बात सामने आई थी कि अस्पताल परिसरों में बायो-मेडिकल वेस्ट (अस्पताली कचरा) का समय पर निस्तारण न होने के कारण ही आवारा कुत्ते वहां खिंचे चले आते हैं. सीएस ने इस कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और मुख्य द्वारों पर सुरक्षा बढ़ाने का आदेश दिया था ताकि कुत्ते अंदर प्रवेश न कर सकें. अधिकारियों की लापरवाही के कारण अस्पताल के वार्डों और ओपीडी के चक्कर काटते यह आवारा कुत्ते किसी बड़े हादसे को आमंत्रण दे रहे हैं. मामले पर सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार ने कहा कि यदि नोडल अधिकारी नहीं बने हैं तो यह गंभीर बात है. इसकी जांच कर दो दिनों के भीतर सभी जगहों पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाएगी.
