Muzaffarpur News: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से जालसाजी का एक बड़ा मामला सामने आया है. पुलिस ने गायघाट थाना क्षेत्र के बेला गोपी गांव में एक ईंट भट्ठे के पास पिछले चार वर्षों से अवैध रूप से चल रही नकली सीमेंट फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है. गुरुवार को गुप्त सूचना के आधार पर हुई इस छापेमारी में पुलिस ने भारी मात्रा में नामी कंपनियों के नकली सीमेंट, रैपर और मशीनें जब्त की हैं. पुलिस के आने की भनक लगते ही फैक्ट्री संचालक, कारीगर और मजदूर अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए.
ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर पैकेजिंग और मशीनें बरामद
पुलिस के मुताबिक, इस अवैध फैक्ट्री में दो बड़ी मशीनों के जरिए देश की जानी-मानी सीमेंट कंपनियों के नाम पर नकली सीमेंट तैयार किया जा रहा था. छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से अल्ट्राटेक, अडानी एसीसी, नोबोको, बांगर और श्री सीमेंट जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम लिखे हुए भरे बैग और हजारों खाली रैपर बरामद किए हैं. इसके अलावा सीमेंट तैयार करने वाली पिसाई मशीन, पैकिंग मशीन, सिलाई मशीन, वजन मशीन और भारी मात्रा में केमिकल भी जब्त किया गया है.
खराब सीमेंट को दोबारा पीसकर बाजार में खपाने का धंधा
शुरुआती जांच में जो सच सामने आया है, वह बेहद चौंकाने वाला है. यह गिरोह जमे हुए और खराब हो चुके रिजेक्टेड सीमेंट को दोबारा मशीनों में पीसकर पाउडर बनाता था. इसके बाद उसे ब्रांडेड कंपनियों के रैपर में पैक कर असली के दाम पर बाजार में सप्लाई कर दिया जाता था. मौके से दो ट्रक भी बरामद हुए हैं, जिन पर भारी मात्रा में नकली सीमेंट लोड था और इसे बाजार में भेजने की तैयारी चल रही थी.
ठेकेदार बनकर 4 साल से आंखों में झोंक रहा था धूल
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह काला धंधा पिछले चार साल से बेधड़क चल रहा था. फैक्ट्री के संचालक की पहचान पियर थाना क्षेत्र के सिमरा गांव निवासी कमलेश सहनी के रूप में हुई है. वह ग्रामीणों और आसपास के लोगों को झांसा देने के लिए खुद को बड़ी सीमेंट कंपनियों का आधिकारिक ठेकेदार बताता था. फिलहाल पुलिस ने पूरा सामान सील कर दिया है और फरार मुख्य आरोपी कमलेश सहनी व उसके गुर्गों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है.
