साहित्य भवन कांटी में नागार्जुन को श्रद्धांजलि, साहित्यकारों ने याद किए उनके विचार

Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर के कांटी साहित्य भवन में नूतन साहित्यकार परिषद की ओर से जनकवि नागार्जुन की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई. कार्यक्रम में साहित्यकारों ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें जनचेतना का प्रखर स्वर बताया.

मुजफ्फरपुर के कांटी से मनोज कुमार मिश्र की रिपोर्ट

Muzaffarpur News: कांटी स्थित साहित्य भवन में नूतन साहित्यकार परिषद की ओर से हिंदी और मैथिली के महान जनकवि नागार्जुन की जयंती श्रद्धा और साहित्यिक गरिमा के साथ मनाई गई. कार्यक्रम की शुरुआत नागार्जुन के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई. इसके बाद साहित्यकारों ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से अपने विचार रखे.

साहित्यिक गरिमा के साथ हुआ आयोजन

कार्यक्रम की अध्यक्षता चंद्रभूषण सिंह चंद्र ने की. इस दौरान साहित्य भवन में मौजूद साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने जनकवि नागार्जुन को श्रद्धांजलि दी. सभी ने उनके साहित्यिक योगदान और सामाजिक चेतना पर आधारित रचनाओं को याद किया.

जनचेतना के प्रखर संवाहक थे नागार्जुन

अपने अध्यक्षीय संबोधन में चंद्रभूषण सिंह चंद्र ने कहा कि बैद्यनाथ मिश्र उर्फ नागार्जुन केवल कवि नहीं बल्कि जनचेतना के प्रखर संवाहक थे. उन्होंने अकाल और गरीबी पर जो रचनाएं लिखीं, वे आज भी कालजयी मानी जाती हैं. उनके साहित्य में आमजन की पीड़ा और संघर्ष की स्पष्ट झलक मिलती है.

समाज और सत्ता पर तीखा व्यंग

साहित्यकारों ने कहा कि नागार्जुन की लेखनी सत्ता के पाखंड, ढोंग और सामाजिक विसंगतियों पर तीखा प्रहार करती थी. किसानों, मजदूरों और वंचित वर्ग की आवाज को उन्होंने अपनी कविताओं और उपन्यासों में मजबूती से उठाया. इसी कारण उन्हें जनकवि के रूप में विशेष पहचान मिली.

विचार व्यक्त करने वाले साहित्यकार

कार्यक्रम में स्वराजलाल ठाकुर ने कहा कि नागार्जुन को प्रगतिवाद का निराला कहा गया है. चन्द्रकिशोर चौबे ने कहा कि उनका साहित्य आज भी सामाजिक चेतना और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में प्रासंगिक है. वहीं रामेश्वर सिंह, सूबेदार नंदकिशोर ठाकुर और महेश कुमार सहित अन्य साहित्यकारों ने भी उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर विचार व्यक्त किए.

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Published by: Purushottam Kumar

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