मुजफ्फरपुर:  चमकी बुखार का कहर, जानिए क्यों बच्चों के शरीर में घट रहा है शुगर

Muzaffarpur News: चमकी बुखार (AES) के बीच हाइपोग्लाइसीमिया बच्चों के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है. जानिए कैसे डॉ. जैकब जॉन के शोध और 'चमकी पर धमकी' अभियान के तहत सतर्कता बरतकर मासूमों की जान बचाई जा रही है. पढ़ें पूरी खबर…

Muzaffarpur News: इस जिले के साथ ही आसपास के जिलों में एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) यानी चमकी बुखार के बीच ‘हाइपोग्लाइसीमिया’ (रक्त में शुगर की कमी) बच्चों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है. इस साल एईएस पीड़ित 28 में से 20 बच्चों में हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण मिले हैं, जहां ब्लड शुगर का स्तर 50 mg/dL से नीचे गिरने के कारण बच्चों की जान पर बन आती है.

डॉ. जैकब जॉन का शोध बना मील का पत्थर

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. गोपाल शंकर सहनी के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त डॉ. जैकब जॉन के 2012-2014 के शोध ने इस बीमारी के इलाज की दिशा बदल दी. उनके सुझाव पर अब अस्पतालों में भर्ती होते ही बच्चों को तुरंत ग्लूकोज (10% डेक्सट्रोज) दिया जाता है. इस त्वरित इलाज से मृत्यु दर में भारी कमी आई है.

इलाज से ज्यादा जरूरी है जमीनी सावधानी

विशेषज्ञों के अनुसार, अस्पताल के इलाज से कहीं ज्यादा जरूरी जमीनी स्तर पर सतर्कता है. सरकार के ‘चमकी पर धमकी’ अभियान के तहत तीन मुख्य बातों पर जोर दिया जा रहा है. बच्चों को रात में कभी भी खाली पेट न सोने दें, केवल घर का बना ताजा और शुद्ध भोजन ही खिलाएं, कुपोषित बच्चों की विशेष देखभाल करें,क्योंकि उन्हें संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा होता है. भविष्य में एईएस के खतरों को न्यूनतम करने के लिए कुपोषण को जड़ से मिटाने की एक ठोस और दीर्घकालिक रणनीति पर काम करना बेहद अनिवार्य है.

मुजफ्फरपुर से कुमार दीपू की रिपोर्ट

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सुनील कुमार सिंह प्रभात खबर मल्टीमीडिया में डिप्टी चीफ रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। क्राइम और राजनीति से जुड़ी खबरों पर उनकी मजबूत पकड़ है। वे निष्पक्ष रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण के लिए जाने जाते हैं, जिससे पाठकों को सटीक और भरोसेमंद जानकारी मिलती है।

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