मुजफ्फरपुर से माधव कुमार की रिपोर्ट
Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल की ‘मॉडल’ व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है. स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे करने वाले इस अस्पताल में अब हालात ऐसे हो गए हैं कि घायल मरीजों को खुद ही अपना सहारा बनना पड़ रहा है.
खुद ही स्ट्रेचर बन गया घायल बिट्टू
आमगोला रोड निवासी 20 वर्षीय बिट्टू कुमार पैर टूटने के बाद इलाज के लिए सदर अस्पताल के आपातकालीन वार्ड पहुंचा. लेकिन वहां न तो उसे स्ट्रेचर मिला और न ही कोई स्वास्थ्यकर्मी मदद के लिए आगे आया.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घायल युवक अस्पताल गेट से रेंगते हुए अंदर पहुंचा. सीढ़ियां चढ़ने के दौरान वह एक पैर के सहारे उछल-उछलकर आगे बढ़ता रहा, लेकिन अस्पताल कर्मियों की संवेदनहीनता बनी रही.
‘मॉडल’ अस्पताल की खुल रही परतें
सदर अस्पताल को ‘मॉडल अस्पताल’ का दर्जा देकर आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत लगातार इन दावों की पोल खोल रही है.
एक दिन पहले ही यह मामला सामने आया था कि अस्पताल में सामान्य मरीजों के लिए अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नहीं है. डॉक्टर प्रतिदिन 25 से 30 मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच लिख रहे हैं, लेकिन मशीन और रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में मरीजों को निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है.
हर दिन मरीजों की जेब पर पड़ रहा बोझ
अल्ट्रासाउंड सुविधा नहीं होने के कारण मरीजों को बाहर 800 से 1000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं. अनुमान के मुताबिक हर दिन करीब 20 से 25 हजार रुपये मरीजों की जेब से निजी जांच केंद्रों में जा रहे हैं.
अब स्ट्रेचर और बुनियादी सहायता तक नहीं मिलने की घटना ने अस्पताल प्रबंधन की तैयारियों और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
लोगों में नाराजगी
स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि अस्पताल में गरीब और जरूरतमंद इलाज के लिए आते हैं, लेकिन यहां उन्हें मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं.
लोगों ने अस्पताल प्रशासन से तत्काल व्यवस्था सुधारने, पर्याप्त स्ट्रेचर उपलब्ध कराने और मरीज सहायता कर्मियों की तैनाती की मांग की है.
क्या कहते हैं अस्पताल प्रबंधन
हालांकि इस मामले में अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन लगातार सामने आ रही व्यवस्थागत खामियों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
