प्रेम प्रसंग में घर से भाग रही पापा की लाडली, प्रेमी संग वीडियो जारी कर मां- बाप से ही जान को बता रहे खतरा

प्रेम-प्रसंग के बाद घर से भागने और सोशल मीडिया पर माता-पिता को खलनायक बताने का खतरनाक ट्रेंड देखा जा रहा है. लड़कियां खुद को बालिग बताकर अपनी मर्जी से शादी का दावा कर रही हैं.

Girl viral video Trend: उत्तर बिहार की औद्योगिक राजधानी कही जाने वाली मुजफ्फरपुर की आबोहवा में अब सिर्फ लीची की मिठास नहीं, बल्कि बगावती प्रेम की कड़वाहट भी घुलने लगी है. जिले में प्रेम-प्रसंग के बाद लड़की के घर से भागने और फिर सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर माता-पिता को ही खलनायक बताने का एक खतरनाक ट्रेंड शुरू हो गया है. कल तक जो बेटियां पिता की लाडली थीं और भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती थीं, वे आज कैमरे के सामने आकर कह रही हैं कि मुझे किसी ने अपहरण नहीं किया है, हम अपनी मर्जी से आए हैं, हम शादी करके खुशी- खुशी रह रहे हैं, अगर मुझे या मेरे पति के परिवार के सदस्यों को कुछ भी हुआ, तो जिम्मेदार मेरे मम्मी-पापा और भाई होंगे. 50 दिनों के अंदर में मुसहरी, मोतीपुर, अहियापुर, बोचहां, साहेबगंज से लापता छात्रा ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करके समाज को नई चुनौती दी है.

सोशल मीडिया बना ''सुरक्षा कवच'' या ढाल

पिछले कुछ महीनों में जिले के विभिन्न थानों में दर्ज शिकायतों पर गौर करें, तो एक पैटर्न साफ नजर आता है. प्रेमी युगल घर से निकलते के कुछ दिन बाद एक वीडियो शूट करते हैं. इस वीडियो में लड़की खुद को बालिग बताती है, अपनी मर्जी से शादी करने का दावा करती है और अंत में एक गंभीर आरोप मढ़ देती है कि उसके मायके वालों से उसकी जान को खतरा है. यह वीडियो देखते ही देखते फेसबुक और व्हाट्सएप ग्रुप में वायरल हो जाता है. पुलिस के लिए यह स्थिति किसी दोधारी तलवार जैसी होती है. एक तरफ माता-पिता की मजबूरी और अपहरण की एफआईआर होती है, तो दूसरी तरफ लड़की का वह वीडियो बयान जो कानूनन उसे अपनी मर्जी से जीने का अधिकार देता है.

अहियापुर पहले व सदर थाना लड़की भागने में दूसरे नंबर पर

जिला पुलिस के पास पहुंच रहे मामलों का डाटा चौंकाने वाला है. जिले में प्रतिमाह औसतन 35 से 40 लड़कियां प्रेम-प्रसंग के कारण घर छोड़ रही हैं. यानी हर दिन कम से कम एक घर की लक्ष्मी नादानी के इश्क में पड़कर अपना घर छोड़ रही है. सबसे अधिक मामला अहियापुर, सदर, नगर, सिकंदरपुर, मिठनपुरा, काजीमोहम्मदपुर, ब्रह्मपुरा, बेला, मोतीपुर, मुसहरी, सकरा, कांटी, साहेबगंज और मीनापुर से आती है.

परिजनों का मीडिया ट्रायल और पुलिस की उलझन

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इन वीडियो के पीछे अक्सर लड़के के परिजनों का हाथ होता है. सोशल मीडिया को वे एक कानूनी हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हैं. लड़की से यह कहलवाया जाता है कि मेरे ससुराल वालों को परेशान न किया जाए. इस एक लाइन से लड़के के परिवार पर होने वाली संभावित पुलिसिया कार्रवाई पर ब्रेक लग जाता है.

बेबस पिता ने रोते हुए कहा... जिसे अंगूली पकड़ कर चलना सिखाया.

जिस बेटी को उंगली पकड़कर चलना सिखाया, उसकी हर छोटी से छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी हर खुशी कुर्बान कर दी. आज एक अनजान शख्स के लिए उन्हें ही जेल गुन की धमकी दे रही है. कई मामलों में तो लड़कियां वीडियो में रोते हुए अपने पिता को दबंग, रंगदार व हत्यारा तक करार दे देती हैं, जिससे सामाजिक रूप से भी उनको


बदलते समाज का कड़वा सच

मनोविज्ञान की प्रोफेसर डॉ. अंकिता कुमारी का मानना है कि सोशल मीडिया की रील लाइफ और वास्तविक जीवन के बीच का अंतर कम हो रहा है. कम उम्र में मोबाइल की पहुंच और फिल्मों के रिबेल लव वाले किरदारों से प्रभावित होकर किशोरियां ये कदम उठा रही हैं. उन्हें लगता है कि घर से भागना बहादुरी है, जबकि हकीकत में वे अपनी सुरक्षा के नाम पर अपनों के ही सम्मान की बलि दे रही हैं.

प्रेम प्रसंग में लड़कियां घर से भाग रही है. हाल के दिनों में उनका वीडियो भी सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित हो रहा है. जिसमें वह अपने माता- पिता से जान को खतरा बताती है. लेकिन, पुलिस का काम है अपहृत बच्ची को सकुशल बरामद कर उसका कोर्ट में बयान कराना.
सिटी एसपी, मोहिबुल्लाह अंसारी


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By Sumit Kumar

सुमित पत्रकारिता में पिछले 4 वर्षों से सक्रिय। प्रभात खबर के प्रिंट मीडिया के साथ काम करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम से जुड़े हुए हैं। क्राइम, हाईपरलोकल, स्वास्थ्य विभाग व राजनीतिक रिपोर्टिंग में विशेष रुचि और अनुभव रखते हैं। क्षेत्रीय मुद्दों और जनसरोकार की खबरों को सशक्त तरीके से उठाने के लिए जाने जाते हैं।

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