प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच पर एमएलसी के सवाल

प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच पर एमएलसी के सवाल

माधव – 60

मुजफ्फरपुर.

बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग की ओर से विभिन्न विषयों में नवनियुक्त प्राध्यापकों के अनुभव प्रमाण पत्र की जांच पर बूटा व बूस्टा की संयुक्त संघर्ष समिति ने चिंता व्यक्त की है. इस मुद्दे पर फुटब के महासचिव व तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान पार्षद डॉ संजय कुमार सिंह ने बूटा-बूस्टा के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की. उन्होंने सरकार और विश्वविद्यालय से मांग किया कि इस प्रक्रिया को तत्काल स्थगित किया जाए. कहा कि विश्वविद्यालयों की ओर से निर्गत अनुभव प्रमाण पत्र पर विवि के कुलसचिव की ओर से जांच के बाद काउंटर हस्ताक्षर किए गए. इसके आधार पर बिहार स्टेट यूनिवर्सिटी सर्विस कमिशन की स्कूटनी कमेटी ने जांच पड़ताल के बाद अभ्यर्थियों को अनुभव का वेटेज दिया है. जिन प्रमाण पत्रों को संदेहास्पद माना गया उसे आयोग ने स्वीकार ही नहीं किया. चयनित अभ्यर्थियों को विवि में ज्वाइन करने से पूर्व उक्त प्रमाण पत्रों की पुनः जांच करवाना समझ से परे है. कहा कि अनुभव प्रमाणपत्र की जांच के लिए जाे प्रपत्र निर्गत हुआ है वह अव्यवहारिक, असंवैधानिक व आपत्तिजनक है. 15 बिंदुओं पर अभ्यर्थियों को दस्तावेज के साथ स्वयं को सही साबित करने को कहा गया है. यह न्याय संगत नहीं है. कहा कि एक तो शिक्षकों की संख्या पूर्व से ही काफी कम है. ऐसे में शिक्षकों से प्रमाणपत्र के नाम पर इस प्रकार की अनावश्यक प्रक्रिया गलत है. उन्होंने कहा कि बूटा-बूस्टा संयुक्त समिति विवि राज्य सरकार से मांग करती है कि अनुभव प्रमाण पत्र की जांच प्रपत्र को वापस ले. इस दौरान बूटा महासचिव प्रो सुनील सिंह, महासचिव प्रो रमेश गुप्ता, कार्यकारी अध्यक्ष प्रो जयकांत सिंह, अधिसभा के सदस्य प्रो संजय सुमन, प्रो प्रमोद समेत अन्य मौजूद थे.

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