मुजफ्फरपुर: नगर निगम की सियासत में शह और मात का खेल एक बार फिर दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है. सशक्त स्थायी समिति के चुनाव में पूर्व विधायक विजेंद्र चौधरी के खेमे के सातों प्रत्याशियों की जीत के बाद माना जा रहा था कि निगम की राजनीति में उनका दबदबा बढ़ गया है. शुरुआती बैठकों में स्टैंडिंग कमेटी ने महापौर के कई एजेंडों को खारिज करते हुए 200 से अधिक योजनाओं को मंजूरी दे दी. अब महापौर की रणनीति ने इस समीकरण को बदलने की कोशिश शुरू कर दी है.
पास योजनाओं पर सीधे नहीं शुरू होगा काम
महापौर और नगर आयुक्त के बीच लगातार हुई बैठकों के बाद निगम में स्वीकृत योजनाओं की जांच को लेकर नयी व्यवस्था लागू की गयी है. अब स्टैंडिंग कमेटी या निगम बोर्ड से किसी योजना के पास होने के बाद उस पर सीधे काम शुरू नहीं होगा. पहले योजना की तकनीकी और जरूरत के आधार पर जांच की जाएगी.
इस व्यवस्था का सबसे अहम पहलू यह है कि जांच में बाहरी तकनीकी अधिकारियों को भी शामिल किया गया है. इससे निगम की आंतरिक राजनीति का असर जांच प्रक्रिया पर पड़ने की आशंका को कम करने की कोशिश की गयी है.
RCD, बुडको और जिला परिषद के अभियंता करेंगे जांच
नगर आयुक्त ने निष्पक्ष जांच के लिए आरसीडी, बुडको और जिला परिषद के कार्यपालक अभियंताओं को जिम्मेदारी सौंपी है. इनके सहयोग के लिए निगम के कार्यपालक अभियंता की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गयी है. इसमें सहायक अभियंता, संबंधित वार्ड के कनीय अभियंता और प्रशासनिक स्तर पर दोनों उप नगर आयुक्त शामिल हैं.
नई व्यवस्था के तहत किसी योजना की वास्तविक जरूरत, स्थल की स्थिति और तकनीकी पहलुओं की जांच के बाद ही उसे आगे बढ़ाया जाएगा.
दोबारा बनी सड़कों की योजना पर उठे थे सवाल
दरअसल, स्टैंडिंग कमेटी और बोर्ड से मंजूर कई योजनाओं को लेकर महापौर, उप महापौर और कुछ पार्षदों ने सवाल उठाये थे. आरोप लगाया गया था कि कुछ ऐसी सड़कों को भी दोबारा निर्माण के लिए योजना में शामिल किया गया, जिनका निर्माण हाल में हुआ था.
कुछ पार्षदों ने बैठकों में यह भी आरोप लगाया था कि राजनीतिक समीकरणों के आधार पर योजनाओं की सूची तैयार करायी गयी और उसे स्टैंडिंग कमेटी से मंजूरी दिलायी गयी. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
आज की बैठक पर टिकी नजर
नगर निगम की सियासत में नये घटनाक्रम के बीच आज सशक्त स्थायी समिति की अहम बैठक होने जा रही है. नयी जांच व्यवस्था के बाद यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है. अब देखना होगा कि बैठक में योजनाओं की जांच और क्रियान्वयन को लेकर क्या रुख सामने आता है और महापौर बनाम स्टैंडिंग कमेटी की सियासी खींचतान किस दिशा में बढ़ती है.
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