मनियारी में लंपी बीमारी का प्रकोप: दर्जनों पशु संक्रमित

मनियारी में लंपी बीमारी का प्रकोप: दर्जनों पशु संक्रमित

मनियारी. मनियारी में भीषण गर्मी और बारिश के बाद मच्छरों और कीड़ों के प्रकोप से एक नई समस्या सामने आई है. मवेशियों में लंपी नामक बीमारी फैल रही है, जिससे उनके पूरे शरीर में सूजन और गांठें हो रही हैं. इस बीमारी से अब तक कई मवेशियों की मौत हो चुकी है. इस स्थिति ने पशुपालकों में हाहाकार मचा दिया है.

छबकी, सुबधिया, पकाही, हरपुर बलड़ा, बलरा किशुन और शाहपुर मरीचा समेत एक दर्जन से अधिक गांवों में यह बीमारी सबसे ज्यादा फैली है.

ये गांव सबसे ज्यादा प्रभावित

छबकी गांव: शाहपुर मरीचा के पूर्व मुखिया और जन सुराज नेता हरिनंदन कुमार पप्पू ने बताया कि इस गांव में बैजू राय, शिवशंकर राय, विजय राय, रामकुमार राय, अरुण राय, जितेंद्र कुमार और बिनोद ठाकुर सहित 100 से ज्यादा किसानों के पशु इस बीमारी से पीड़ित हैं. उन्होंने प्रशासन पर कुंभकर्णी नींद में सोने का आरोप लगाया और आंदोलन की चेतावनी दी. पप्पू ने मनियारी के पशु चिकित्सक से संपर्क किया, जिन्होंने बताया कि अभी विभाग के पास कोई दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है.

हरपुर बलड़ा: यहां के किसान विनय साह, विष्णुदेव साह, विजय साह, अमरनाथ साह और विकास देव ने बताया कि पिछले एक हफ्ते से उनकी गायों में अचानक यह बीमारी हो गई है. उन्होंने बताया कि विभाग की तरफ से अब तक कोई पहल नहीं हुई है, और वे ग्रामीण चिकित्सकों से इलाज कराकर थक चुके हैं. वे देसी नुस्खे जैसे नीम के पत्ते, नारियल तेल और कपूर का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा है. किसानों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि उन्होंने कर्ज लेकर गायें खरीदी हैं और अब इस बीमारी ने उनकी कमर तोड़ दी है.

विभाग का जवाब और पशुपालकों के लिए सलाह

मनियारी के पशु चिकित्सक पवन कुमार ने बताया कि उन्हें पशुपालकों से जानकारी मिली है, और वे संक्रमित पशुओं की जांच करके दवाएं बांट रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि विभाग को इस स्थिति की जानकारी है और जल्द ही वैक्सीन उपलब्ध होते ही पशुओं को दी जाएगी.

चिकित्सक ने दी सलाह

संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें.

पशुशाला को साफ-सुथरा रखें.

पशुओं को कीड़े-मच्छरों से बचाएं.

संक्रमित पशुओं के घावों पर नारियल तेल और कपूर मिलाकर लगाएं.

घावों को नीम के पानी से धोएं.

पशुपालक फिलहाल इन देसी उपायों और कुछ स्थानीय चिकित्सकों की मदद से ही अपने पशुओं को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. विभाग की ओर से वैक्सीन की उपलब्धता का इंतज़ार किया जा रहा है.

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Author: PRASHANT KUMAR

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