Muzaffarpur DRI action:मुजफ्फरपुर डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) की टीम ने ड्रग्स तस्करी के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. DRI ने एक सटीक खुफिया इनपुट के आधार पर फतुहा स्थित एक गुप्त गोदाम पर अचानक धावा बोला. इस त्वरित प्रवर्तन कार्रवाई (छापेमारी) ने अंतरराज्यीय फार्मास्युटिकल ड्रग रैकेट की कमर तोड़ कर रख दी है.
कार्टन में छिपाई गई थीं 18 लाख बोतलें
गोदाम की तलाशी के दौरान अधिकारियों को भूरे रंग के गत्ते के डिब्बों (कार्टन) में बेहद शातिर तरीके से छिपाई गई प्रतिबंधित कोडाइन युक्त कफ सिरप की कुल 1,80,000 बोतलें मिलीं. DRI ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इस भारी खेप को जब्त कर लिया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में बरामद की गई इस खेप की अनुमानित कीमत करीब 1.75 करोड़ रुपए आंकी गई है.
फर्जी पते और रद्द लाइसेंस पर चल रहा था खेल
DRI की प्रारंभिक जांच में इस दवा सिंडिकेट की सप्लाई चेन को लेकर बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. कागजी दस्तावेजों को खंगालने पर पता चला कि इस खेप को जिस प्राप्तकर्ता (रिसीवर) के नाम पर भेजा गया था, उसका ड्रग लाइसेंस काफी समय पहले ही रद्द किया जा चुका था. इतना ही नहीं, जब अधिकारियों ने दर्ज पते की भौतिक पड़ताल की, तो वह भी पूरी तरह फर्जी और अस्तित्वहीन पाया गया. साफ है कि वैध फार्मास्युटिकल व्यापार की आड़ में इस प्रतिबंधित नशीली सिरप को पूरी तरह से ब्लैक मार्केट में खपाने की तैयारी थी.
एनडीपीएस एक्ट के तहत जब्ती और जांच
अधिकारियों के मुताबिक, कफ सिरप में मौजूद 'कोडाइन फॉस्फेट' एक अत्यधिक व्यसनकारी स्वापक (नार्कोटिक) पदार्थ है. इसी वजह से यह स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत पूरी तरह से विनियमित है. युवाओं में नशे के लिए इसकी भारी मांग को देखते हुए इसे तस्करी के लिए मंगवाया गया था. फिलहाल DRI की विशेष टीमें इस फार्मास्युटिकल ड्रग सिंडिकेट के मुख्य सरगनाओं, अवैध वितरकों और स्थानीय नेटवर्क को बारीक से ट्रेस करने में जुटी हैं.
