गोमाता शब्द भर नहीं, यह भारतीय संस्कृति
Cow is not just a word, it is Indian culture
डी-28
गोशाला सिकंदरपुर में हुए कार्यक्रम में उभरे विचारवरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर
गोमाता शब्द भर नहीं, यह भारतीय संस्कृति का प्रतीक भी है. यह विचार गोपाष्टमी पर मुजफ्फरपुर गोशाला सिकंदरपुर में आचार्यों ने कहे. वैदिक मंत्रों से वेद लक्ष्णा (वेदलक्षणा) गो माताओं का भक्तों ने श्रद्धापूर्वक पूजन किया. ज्यादा से ज्यादा मातृशक्तियों ने सहभागिता की. पूजन के बाद गो पालकों में वस्त्र बांटे गये. कन्हौली स्थित गोशाला परिसर में भी आनंद मेला लगा. उद्घाटन मुख्य अतिथि श्याम सुंदर भीमसेरिया, अध्यक्ष, उत्तर बिहार वाणिज्य एवं उद्योग परिषद श्याम सुंदर भरतिया, अध्यक्ष, बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन, डाॅ रमेश केजरीवाल, संयोजक, मुक्तिधाम प्रबंध समिति, पुरुषोत्तमलाल पोद्दार, गोशाला उपाध्यक्ष, ने संयुक्त रूप से किया.गाय देवी का स्वरूप
वक्ताओं ने कहा कि गाय देवी का स्वरूप है. गोमाता शब्द भारतीय संस्कृति में गाय के प्रति गहरे आदर व श्रद्धा का प्रतीक है. क्योंकि वह मनुष्य को दूध देकर पालन पोषण करती है. यह ठीक उसी तरह है जैसे मां अपने बच्चों का पालन करती है. संचालन गोशाला सचिव कृष्ण मुरारी भरतिया ने किया. अतिथियों का स्वागत गोशाला उपाध्यक्ष पुरुषोत्तमलाल पोद्दार ने किया. गरीबनाथ बंका, सज्जन शर्मा, रवि मोटानी, मनोज केजरीवाल आदि उपस्थित थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
