पाक्सो मामले में गायघाट के पूर्व थाना प्रभारी की अग्रिम जमानत याचिका विशेष कोर्ट से खारिज

मुजफ्फरपुर की विशेष अदालत ने पॉक्सो मामले में गायघाट के पूर्व थाना प्रभारी राजा सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है. समन मिलने के बावजूद अदालत में पेश न होने पर यह सख्त फैसला सुनाया गया है. इस फैसले से पूर्व थाना प्रभारी की मुश्किलें बढ़ गई हैं.

पॉक्सो विशेष अदालत:  मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट थाना के पूर्व थाना प्रभारी राजा सिंह को पॉक्सो से जुड़े एक गंभीर मामले में अदालत से करारा झटका लगा है. विशेष कोर्ट पॉक्सो एक्ट संख्या-एक के न्यायाधीश धीरेंद्र मिश्रा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपित पूर्व थानेदार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है. समन मिलने के बाद भी कोर्ट में हाजिर नहीं होने पर विशेष न्यायाधीश ने कड़ा फैसला लिया है. कोर्ट के इस कड़े आदेश के बाद अब आरोपित पूर्व पुलिस अधिकारी पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है.

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि उनके मुवक्किल पूरी तरह निर्दोष हैं और पुरानी रंजिश के चलते उन्हें इस मामले में साजिश के तहत झूठा फंसाया गया है. हालांकि विशेष अदालत ने केस से जुड़े दस्तावेजों, पुलिस डायरी और अदालती रिकॉर्ड का गहन अवलोकन करने के बाद बचाव पक्ष के तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया.

कोर्ट द्वारा जमानत खारिज करने के मुख्य आधार

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपित कानून से भागने की कोशिश कर रहा है. कोर्ट के सामने आए प्रमुख बिंदु:

  • समन की तामीला: आरोपित को विशेष अदालत की तरफ से 16 जुलाई को ही कानूनी समन तामील कराया जा चुका था.
  • कार्यालय द्वारा रिसीविंग: यह कानूनी समन उनके कार्यालय द्वारा बाकायदा विधिवत रिसीव भी किया गया था.
  • लगातार गैरहाजिरी: समन मिलने की स्पष्ट पुष्टि के बावजूद आरोपित जानबूझकर अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं हो रहे थे.

विशेष अदालत ने इस आचरण को देखते हुए अग्रिम जमानत याचिका को सुनवाई योग्य नहीं माना और उसे निरस्त करते हुए मामले को आगे की कानूनी व न्यायिक प्रक्रिया के लिए बढ़ा दिया.

पुत्रियों से छेड़छाड़ का है गंभीर आरोप

यह पूरा मामला एक पीड़िता द्वारा विशेष अदालत में दर्ज कराए गए परिवाद पत्र से जुड़ा है. पीड़िता ने पूर्व थाना प्रभारी राजा सिंह समेत अन्य लोगों पर अपनी पुत्रियों के साथ गंभीर छेड़छाड़ व बदसलूकी का आरोप लगाया था. इस परिवाद पर विशेष अदालत पहले ही प्रथम दृष्टया साक्ष्यों के आधार पर संज्ञान ले चुकी है. अब जमानत याचिका खारिज होने से आरोपित की मुश्किलें बढ़ गई हैं.

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लेखक के बारे में

By प्रेमांशु शेखर

प्रेमांशु शेखर को पत्रकारिता में 18 से अधिक वर्षों का अनुभव है. वह दिल्ली विश्वविद्यालय साउथ कैंपस के छात्र रहे हैं और दिल्ली में भी काम कर चुके हैं. वह पिछले 16 साल से अपराध, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग कर रहे हैं.

 

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