BJP Leader Demise: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं गायघाट भाजपा के भीष्म पितामह के रूप में विख्यात विजय कुंवर (78 वर्ष) का सोमवार सुबह निधन हो गया. उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे गायघाट क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई. पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने इसे भाजपा के लिए अपूरणीय क्षति बताया है.
1977 आंदोलन से पहचान और संगठनात्मक सफर
विजय कुंवर का राजनीतिक सफर काफी संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक रहा है.
- आंदोलन से जुड़ाव: वे वर्ष 1977 के ऐतिहासिक छात्र आंदोलन के सक्रिय नेता रहे थे.
- संगठन निर्माण: उन्होंने भाजपा को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वे पार्टी के प्रथम मंडल अध्यक्ष रहे और इसके बाद प्रदेश स्तर के संगठन में विभिन्न पदों पर रहे.
- 1995 का ऐतिहासिक चुनाव: वर्ष 1995 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के टिकट पर आनंद मोहन के खिलाफ चुनाव लड़कर अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई थी.
नेताओं व कार्यकर्ताओं ने जताया गहरा शोक
संगठन के प्रति निष्ठा, सादगी और आत्मीय व्यवहार के कारण वे सभी के बीच सम्मानित थे. उनके निधन पर कई दिग्गजों ने शोक व्यक्त किया.
- शोक व्यक्त करने वाले नेता: प्रखंड प्रमुख श्रवण कुमार सिंह, सांसद प्रतिनिधि शशांक शेखर चौहान, भाजपा मंडल अध्यक्ष जयप्रकाश गामी, राघवेंद्र सिंह, संजागर सहनी, बिपिन सिंह, आदित्य साहिल, प्रशांत ठाकुर, संजीत सिंह सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने संवेदना जताई.
- अंतिम श्रद्धांजलि: नेताओं ने कहा कि विजय कुंवर गायघाट में भाजपा के मजबूत स्तंभ थे और उनके निधन से हुई क्षति की भरपाई संभव नहीं है.
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