मछली उत्पादन में बिहार के मछुआरे का योगदान 20 % से ज्यादा

मछली उत्पादन में बिहार के मछुआरे का योगदान 20 % से ज्यादा

डी-18

वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर

बिहार के मछली पालकों को सशक्त बनाने व मत्स्य पालन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र में हुआ.जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ राज भूषण चौधरी ने इसकी अध्यक्षता की. आतंकी हमलों में शहीद हुए बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए एक मिनट का मौन रखा. बताया कि बिहार में मछली उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि है. यहां 60 लाख से अधिक मछुआरे रहते हैं जो भारत की अंतर्देशीय मछली उत्पादक आबादी में 20% से अधिक का योगदान देते हैं. 2014-15 में 4.8 लाख मीट्रिक टन से 2023-24 में 8.7 लाख मीट्रिक टन तक उत्पादन पहुंचा है. इसमें अपार संभावनाएं है. उद्घाटन के बाद 14 केंद्रीय और राज्य सरकार की योजनाओं की रूपरेखा वाली एक विशेष रूप से क्यूरेट की गयी पुस्तिका का आधिकारिक विमोचन किया गया.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मत्स्य पालन क्षेत्र अहम

कार्यशाला में बिहार सरकार की पशु और मत्स्य संसाधन मंत्री रेणु देवी और पंचायती राज मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता शामिल थे. दोनों मंत्रियों ने बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मत्स्य पालन क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया और इसके निरंतर विकास के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की. डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि के कुलपति पुण्यव्रत सुविमलेंदु पांडे ने भी जलीय कृषि में प्रगति को आगे बढ़ाने में नवाचार व अनुसंधान के महत्त्व पर प्रकाश डाला.

उत्पादक समूहों के लाभों को साझा किया

डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि में मत्स्य पालन महाविद्यालय के डीन डॉ पी शिवेंद्र कुमार व आरके ब्रह्मचारी ने कार्यशाला का उद्घाटन किया. इसके अतिरिक्त, ग्राम श्री प्राइवेट लिमिटेड के सीए प्रियदर्शी पुनीत ने सहयोग और सौदेबाजी की शक्ति बढ़ाने के लिए मछली किसानों को उत्पादक समूहों में संगठित करने के लाभों को साझा किया. कार्यशाला का समापन डॉ पीपी श्रीवास्तव ने किया.

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Author: KUMAR GAURAV

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