मुजफ्फरपुर से विनय कुमार की रिपोर्ट
Bihar Government School Digital Class room: बिहार के सरकारी स्कूलों की सूरत और सीरत बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. मुजफ्फरपुर जिले के 16 सरकारी स्कूलों को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस कर ‘मॉडलस्कूल’(Model School) के रूप में विकसित किया गया है, जहाँ आगामी जुलाई महीने से नए सत्र की पढ़ाई शुरू हो जाएगी. इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत शहर के ऐतिहासिक जिला स्कूल और मुखर्जी सेमिनरी स्कूल को भी मॉडल स्कूल का दर्जा दिया गया है. इन स्कूलों में फिलहाल नौवीं से 12वीं कक्षा तक के छात्र-छात्राओं के नामांकन की प्रक्रिया तेजी से चल रही है. इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के गरीब व मेधावी बच्चों को निजी कॉन्वेंट स्कूलों जैसा माहौल और विश्वस्तरीय सुविधाएं देना है.
डिजिटल क्लासरूम में होगी बच्चों की पढ़ाई,
इन 16 मॉडल स्कूलों में बच्चे अब पारंपरिक चाक और ब्लैकबोर्ड की जगह आधुनिक डिजिटल स्मार्ट बोर्ड से पढ़ाई करेंगे. कठिन विषयों को आसानी से समझाने के लिए क्लासरूम में प्रोजेक्टर के जरिए विजुअल लर्निंग (VisualLearning) की व्यवस्था की गई है. इसके अलावा, विज्ञान की पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए भौतिकी (Physics), रसायन (Chemistry) और जीव विज्ञान (Biology) की अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं (Labs) बनाई गई हैं, जहा छात्र खुद प्रैक्टिकल कर सकेंगे. स्कूलों में शुद्ध पेयजल, छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग आधुनिक शौचालय, समृद्ध लाइब्रेरी और खेलकूद के लिए बेहतर मैदान व स्पोर्ट्स किट की व्यवस्था की जा रही है.
कॅरियर काउंसलिंग और कंप्यूटर कोडिंग के लिए अलग से बनेगा विशेष सेल
किताबी ज्ञान के अलावा छात्रों के भविष्य को संवारने के लिए भी खास इंतजाम किए जा रहे हैं. छात्र-छात्राओं को 12वीं के बाद सही राह चुनने में मदद करने के लिए विशेषज्ञों द्वारा कॅरियर काउंसलिंग (Career Counseling) की विशेष व्यवस्था की गई है. इसके साथ ही आत्मनिर्भर बनाने के लिए तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के लिए अलग से सेल का गठन किया गया है.यहाँ बच्चों को कंप्यूटर कोडिंग, स्किल डेवलपमेंट और रोजगारपरक कोर्सेज भी सिखाए जाएंगे.
NMMS परीक्षा पास करने वाले छात्रों को मिलेगी प्राथमिकता
सर्व शिक्षा अभियान के डीपीओ (DPO) सुजीत कुमार दास ने बताया कि इन मॉडल स्कूलों में केवल प्रशिक्षित और योग्य शिक्षकों की ही नियुक्ति की गई है. नामांकन के लिए सबसे पहली प्राथमिकता उन छात्र-छात्राओं को दी जा रही है, जिन्होंने ‘नेशनलमींस कम मेरिट स्कॉलरशिप’(NMMS) परीक्षा पास की है. इस परीक्षा में छात्र के न्यूनतम 50 फीसदी अंक होने अनिवार्य हैं. प्राप्त आवेदनों के आधार पर अंकों के अवरोही क्रम (DescendingOrder) में मेधा सूची (MeritList) बनाई जाएगी. इसके अलावा, आठवीं की वार्षिक परीक्षा में बेहतर अंक लाने वाले सामान्य छात्रों की भी मेरिट लिस्ट बनाकर नामांकन लिया जा रहा है.
