Muzaffarpur News: शहर की चर्चित लेखिका डॉ. भावना को वर्ष 2026 के लिए साहित्यायन फाउंडेशन, मुंबई का प्रतिष्ठित नंदलाल पाठक साहित्य पुरस्कार प्रदान किया जाएगा. यह सम्मान 17 अक्टूबर को मुंबई स्थित आदित्य बिड़ला परफॉर्मिंग आर्ट्स एकेडमी में आयोजित समारोह में दिया जाएगा. पुरस्कार के तहत उन्हें ढाई लाख रुपये की सम्मान राशि, सम्मान-पत्र और मोमेंटो प्रदान किया जाएगा. फाउंडेशन ने उनका चयन साहित्य में उत्कृष्ट योगदान, साहित्यिक साधना और उल्लेखनीय उपलब्धियों के आधार पर किया है.
साहित्य में उल्लेखनीय योगदान के लिए मिला सम्मान
डॉ. भावना को इससे पहले भी साहित्य के क्षेत्र में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं. बिहार सरकार ने उन्हें कविता और आलोचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए महादेवी वर्मा पुरस्कार से सम्मानित किया है. इसके अलावा अंबिका प्रसाद दिव्य अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार, राजभाषा पांडुलिपि पुरस्कार, दुष्यंत कुमार रजत स्मृति सम्मान, अपराजिता सम्मान, लिच्छवी महोत्सव सम्मान, तिलकामांझी राष्ट्रीय सम्मान और साहित्य सर्जक सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें प्राप्त हो चुके हैं.
ग़ज़ल, कविता और आलोचना की 26 पुस्तकें प्रकाशित
डॉ. भावना समकालीन हिंदी ग़ज़ल, कविता, आलोचना और बज्जिका साहित्य की प्रमुख रचनाकार हैं. अब तक उनकी 26 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं. उनके चर्चित ग़ज़ल संग्रहों में अक्स कोई तुम-सा, शब्दों की कीमत, चुप्पियों के बीच, धुंध में धूप और चिड़ियों की दावेदारी शामिल हैं. आलोचना, बज्जिका साहित्य और संपादन के क्षेत्र में भी उनका उल्लेखनीय योगदान रहा है. वह हिंदी की ई-साहित्यिक मासिक पत्रिका आंच का संपादन भी कर रही हैं.
विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल हैं रचनाएं
डॉ. भावना की साहित्यिक उपलब्धियों को देखते हुए उत्तर महाराष्ट्र विश्वविद्यालय, जलगांव के एमए (हिंदी) पाठ्यक्रम में उन्हें ग़ज़लकार के रूप में स्थान दिया गया है. उनके साहित्य और व्यक्तित्व पर केंद्रित कई शोधपरक एवं संपादित पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी हैं, जो उनकी साहित्यिक पहचान को और मजबूत करती हैं.
साहित्य जगत ने दी बधाई
यह सम्मान मिलने की घोषणा के बाद साहित्यकारों और शिक्षाविदों ने डॉ. भावना को बधाई दी. अनिरुद्ध सिन्हा, राहुल शिवाय, प्रो. डॉ. नवैदुल हक, डॉ. अभय नंदा श्रीवास्तव, डॉ. जयनाथ, डॉ. जियाउर रहमान जाफरी और डॉ. अविनाश भारती सहित अनेक साहित्यकारों ने इसे मुजफ्फरपुर और बिहार के लिए गर्व का विषय बताया.
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