Bhagat Singh: भगत सिंह हथियार खरीदने के लिये रुपयों की जुगाड़ में आये थे मुजफ्फरपुर, बेतिया में बदला था नाम

Bhagat Singh: शहीद दिवस के मौके पर प्रभात खबर आपको भगत सिंह की उस कहानी के बारे में बताने जा रहा है जब वो मुजफ्फरपुर आये था.

Bhagat Singh, विनय, मुजफ्फरपुर: शहीद-ए-आजम भगत सिंह हथियारों के लिए रुपयों का जुगाड़ करने मुजफ्फरपुर आए थे. इरादा था कि कहीं डाका डालकर (क्रांतिकारियों ने इसे एक्शन नाम दिया था) रुपयों का इंतजाम किया जाये. मुजफ्फरपुर आने से पहले वह बेतिया गये थे, लेकिन वहां एक्शन लायक स्थिति नहीं बनने के कारण वह योगेंद्र शुक्ल के साथ मुजफ्फरपुर लौट आये थे और यहां दो-तीन दिन रहकर प्लान बनाया था. भगत सिंह अपने दो अन्य साथियों के साथ मुजफ्फरपुर आए थे. उनके दोनों साथी यहां के एक धर्मशाला में हथियारों के साथ ठहरे हुए थे.

दिल्ली की मीटिंग में क्या तय हुआ

सरकारी गवाह बनने के बाद बेतिया के फणींद्रनाथ घोष ने लिखित गवाही में इसका जिक्र किया है. जिसका जिक्र राजकमल प्रकाशन से 2014 में प्रकाशित (भगत सिंह को फांसी-2, चुनिंदा गवाहियां, लेखक-मालविंद्र सिंह वरैच और राजवंती मन) में विस्तार से किया गया है. फणींद्र घोष ने गवाही में कहा कि दिल्ली की मीटिंग में यह तय हुआ था कि बेतिया में एक्शन किया जाये, जिससे हथियारों के लिए रुपयों का प्रबंध हो सके. भगत सिंह ने कहा था कि वह बाल और दाढ़ी मूंछ कटवा कर बंगाली पहनावे में बेतिया पहुंचेंगे. 26 सितंबर, 1928 को वह मुजफ्फरपुर में अपने दो साथियों को छोड़ कर बाल-दाढ़ी मुड़वा कर चंद्रशेखर आजाद के साथ बेतिया पहुंचे थे.

बेतिया में हमलोगों ने बदल लिए थे अपने नाम

गवाही में फणींद्रनाथ घोष ने कहा था कि बेतिया में एक साथ हम सभी क्रांतिकारी एकत्रित हुए थे. हम सभी ने अपने नाम बदल लिये थे. भगत सिंह का नाम रंजीत, मनमोहन बनर्जी का नाम खुदीराम, शिव वर्मा का नाम प्रभात, कुंदन लाल का नाम प्रताप, मेरा नाम दादा और चंद्रशेखर आजाद का नाम पंडित रखा गया था. बेतिया पहुंचने के बाद भगत सिंह ने पूछा था कि एक्शन के लिए कोई जगह देखी है या नहीं. मैंने कहा, अभी नहीं तो वह नाराज हो गया. हमलोग मनमोहन बनर्जी के मकान की आरे चले, लेकिन घर से आधा मील दूर रुक गए. मनमोहन अपने घर से रोटी लाया. भोजन के बाद चंद्रशेखर आजाद को बलवा रामपुर में बाबू राम के घर ठहराया गया.

बेतिया में एक्शन से कर दिया था इनकार

फणींद्रनाथ घोष ने कहा था कि सुबह में हम सभी संत घाट पर मिले. डकैती के लिए मैंने चंद्रशेखर आजाद को कुछ मारवाड़ियों की दुकानें दिखायी, लेकिन चंद्रशेखर आजाद तैयार नहीं हुए. तय हुआ कि योगेंद्र शुक्ल और भगत सिंह मुजफ्फरपुर में एक्शन की तैयारी करे. योगेंद्र शुक्ल ने भगत सिंह को एक रिवाल्वर और तीन कारतूस भी दिये. दूसरे दिन दोनों मुजफ्फरपुर चले गये. तीन चार दिन बाद भगत सिंह ने बताया कि जल्दी ही मुजफ्फरपुर में एक्शन होगा, लेकिन वहां भी वैसी स्थिति नहीं बनी.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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