बालिका गृह कांड: पीड़िताओं को न्याय मिला या नहीं? CBI ने मुजफ्फरपुर डीएम से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

CBI ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की पीड़िताओं को मिले मुआवजे और उनके पुनर्वास की वर्तमान स्थिति पर जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है.

मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड में पीड़िताओं को दिए गए मुआवजे और उनके पुनर्वास की वर्तमान स्थिति को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. CBI की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, पटना की ओर से मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी (DM) को पत्र भेजकर तत्काल कार्रवाई करते हुए यह रिपोर्ट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है.

दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश पर CBI की कार्रवाई

CBI के अपर पुलिस अधीक्षक एवं जांच अधिकारी पवन कुमार श्रीवास्तव द्वारा जारी पत्र के अनुसार, दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस साल 30 जून को आरोपियों की आपराधिक अपीलों की सुनवाई के दौरान CBI को विशेष निर्देश दिए हैं. अदालत ने स्पष्ट करने को कहा है कि पीड़िताओं को ट्रायल कोर्ट द्वारा निर्धारित मुआवजा मिला है या नहीं. इसके साथ ही पीड़िताओं के पुनर्वास के लिए अब तक उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी भी मांगी गई है. जिला प्रशासन से मिलने वाली इस रिपोर्ट के आधार पर CBI दिल्ली उच्च न्यायालय में अपनी स्थिति रिपोर्ट (Status Report) दाखिल करेगी.

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49 पीड़िताओं को मिल चुका है मुआवजा

इस संवेदनशील मामले में बिहार सरकार पूर्व में ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), नई दिल्ली को मुआवजा भुगतान से संबंधित रिपोर्ट सौंप चुकी है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, मामले की 49 पीड़िताओं को तीन से नौ लाख रुपये तक की मुआवजा राशि दी जा चुकी है. गौरतलब है कि पुलिस और CBI की कार्रवाई के बाद 29 नवंबर 2018 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी इस मामले को लेकर केस दर्ज किया था और मुआवजे की अनुशंसा की थी. इसके अलावा दिल्ली की साकेत कोर्ट ने भी मुआवजा देने का आदेश जारी किया था, जबकि पूरे मामले की मॉनिटरिंग सुप्रीम कोर्ट द्वारा की जा रही थी.

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TISS की रिपोर्ट से हुआ था खुलासा

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) की ऑडिट रिपोर्ट में मुजफ्फरपुर बालिका गृह में बच्चियों के साथ हो रहे यौन शोषण और प्रताड़ना का सनसनीखेज खुलासा हुआ था. इसके बाद 31 मई 2018 को समाज कल्याण विभाग के सहायक निदेशक के बयान पर मुजफ्फरपुर के महिला थाने में इस मामले की प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई थी. इस मुख्य मामले में ब्रजेश ठाकुर (संरक्षक), इंदु कुमारी (अधीक्षिका), मीनू देवी (हाउस मदर) और तत्कालीन सहायक निदेशक रोजी रानी समेत कई आरोपियों को कोर्ट द्वारा सजा सुनाई जा चुकी है.


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Published by: Sumit Kumar

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