बागमती तटबंध क्षेत्र के किसानों को बड़ी राहत, बांध के बीच आने वाली कृषि भूमि का नहीं होगा अधिग्रहण

बागमती तटबंध विस्तार योजना में किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है. जल संसाधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि कृषि भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा, जिससे किसानों की जमीन सुरक्षित रहेगी.

Bagata Embankment Relief:  जिले को बाढ़ की विभीषिका से बचाने के लिए बागमती तटबंध के विस्तारीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है. इसके तहत नदी के दाएं और बाएं दोनों तटबंधों पर निर्माण कार्य चल रहा है. इसी बीच जल संसाधन विभाग ने एक महत्वपूर्ण संकल्प जारी किया है, जिससे तटबंध क्षेत्र के किसानों को बड़ी राहत मिली है. नए फैसले के तहत बागमती बांध के बीच आने वाली कृषि भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा. जल संसाधन विभाग ने इस संबंध में संबंधित जिला प्रशासन को दिशा-निर्देश जारी कर अवगत करा दिया है.

तकनीकी सलाहकार समिति से मिली स्वीकृति, आवासीय भूमि का ही होगा अधिग्रहण

बागमती तटबंध विस्तार की इस महत्वाकांक्षी योजना पर भारत सरकार के जल संसाधन मंत्रालय की तकनीकी सलाहकार समिति ने अपनी सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान कर दी है. योजना के धरातल पर उतरने से इलाके को बाढ़ से स्थायी निजात मिलने की उम्मीद है. जल संसाधन विभाग द्वारा जारी संकल्प में यह साफ कर दिया गया है कि तटबंधों के बीच पड़ने वाली सिर्फ बासगीत (आवासीय) भूमि का ही अधिग्रहण किया जाएगा. खेती योग्य जमीन का अधिग्रहण नहीं होगा और इस पर रैयतों (किसानों) का स्वामित्व पूरी तरह बरकरार रहेगा. प्रशासनिक स्वीकृति की तिथि को जो भूमि बासगीत उपयोग में पाई जाएगी, उसी का अधिग्रहण होगा. बासगीत भूमि के धारकों को नई भू-अर्जन नीति के तहत मुआवजा और पुनर्वास का पूरा लाभ दिया जाएगा.

पुनर्वास के बाद खाली करना होगा तटबंध, जिला प्रशासन बरतेगा कड़ाई

विभाग ने अपने आदेश में एक गंभीर समस्या की ओर भी ध्यान आकृष्ट कराया है. अक्सर देखा जाता है कि पुनर्वास योजना का लाभ मिलने और मुआवजा प्राप्त करने के बाद भी कई परिवार तटबंध पर बने अपने पुराने मकानों को खाली नहीं करते हैं. बाढ़ आने की स्थिति में तटबंध पर डटे इन परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने में जल संसाधन विभाग और राहत बचाव दल को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इस समस्या से निपटने के लिए विभाग ने सख्त रुख अपनाया है. जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि जिन परिवारों को पुनर्वास योजना का लाभ पहले ही दिया जा चुका है, उन्हें बाढ़ आने से पूर्व ही तटबंध से हटाना सुनिश्चित किया जाए.


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प्रभात कुमार, पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रभात का 18 वर्षों का अनुभव है. प्रशासनिक नीतियों के विश्लेषण, राजनीतिक घटनाक्रमों की सटीक रिपोर्टिंग और खोजी पत्रकारिता में इनकी रुचि है. जटिल विषयों को सरल और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की इनमें क्षमता है.

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